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हर पल हसणे वाले को,खुद हसणे का भी वक़्त नही

हर खुशी है लोगो के दामन मे,
पर एक हसी के लिए वक़्त नही,
दिन रात दौड़ती दुनिया मे,
ज़िंदगी के लिए वक़्त नही,

माँ की लॉरी का एहसास तो है,
पर माँ को माँ कहने का वक़्त नही,
सारे रिश्तो को तो हम मार चुके,
उन्हे दफ़नाने का भी वक़्त नही,

सारे नाम मोबाइल मे हैं,
लेकिन दोस्ती के लिए वक़्त नही,
दिल है गम से भरा हुआ,
पर रोने का भी वक़्त नही,

पैसे की दौड़ मे ऐसे दौड़े,
की थकने का भी वक़्त नही,
पराए एहसासो की क्या कद्र करे,
जब अपने सपनों के लिए ही वक़्त नही,

तू ही बता ए ज़िंदगी,
इस ज़िंदगी का क्या होगा,
की हर पल हसणे वाले को,
खुद हसणे का भी वक़्त नही,
की हर पल हसणे वाले को,
खुद हसणे का भी वक़्त नही

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Comment by Rana Pratap Singh on September 6, 2010 at 6:36pm
भौतिकता के इस अंधड़ में
प्रेम कहीं पर बचा नहीं है|
दो बातें मिलकर कर ले हम
इतना वक्त भी बचा नहीं है
Comment by Raju on March 30, 2010 at 10:01pm
bahut badhiya Preetam bhaiya.....aaj Aadmi sab kuch pa leta hai per uske pass time nahi hota

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