For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मौत ही रास्ता नहीं होता (ग़ज़ल 'राज ')

२१२२ १२१२ २२

हुस्न गर  बावफ़ा नहीं होता,

दिल कभी आशना नहीं होता

 

खेलना दिल से तोड़ देना फिर

ये कोई  कायदा नहीं होता

 

दिल्लगी से हुए तमाशे का

हर कहीं तज़करा नहीं होता

 

जान पाता कभी नहीं उसको

,मैं अगर आइना नहीं होता 

 

मार देती ये तिश्नगी मुझको,

काश ये मयकदा नहीं होता

 

मुश्किलों से निजात पाने को,

मौत ही रास्ता नहीं होता

 

छेड़ता वो न बारबार इसको,

जख्म मेरा हरा नहीं होता

 

रास्ते हो गए अलग अपने ,

आजकल सामना नहीं होता

 

 भूल जाता मै बेवफाई सब

,काश यूँ सिरफिरा नहीं होता

-----मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 450

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 25, 2016 at 8:30pm

आ० विजय निकोर जी,ग़ज़ल पर शिर्कत और सुखन नवाजी का बेहद शुक्रिया आप प्रतिक्रिया देते हैं तो अच्छा लगता है |  


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 25, 2016 at 8:29pm

आ० रवि शुक्ल भैया,आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लेखन कर्म सार्थक हुआ तहे दिल  से बहुत बहुत आभार शुक्रिया आपका .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 25, 2016 at 8:27pm

आ० डॉ० आसुतोष जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ आपने जो शेर कोट किया है उसमे एक व्यथित हारे हुए हृदय के भाव हैं की काश मैं प्यासा ही मर जाता ये मयकदा क्यूँ आ गया बचाने ...शायद मैं अब सपष्ट कर सकी |आपका तहे दिल से आभार |  


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 25, 2016 at 8:24pm

आ०  धर्मेन्द्र जी ,ग़ज़ल पर शिरकत और दाद के लिए तहे दिल से शुक्रिया |

Comment by vijay nikore on April 24, 2016 at 4:08pm

 

आपसे एक और खूबसूरत गज़ल मिली। बधाई।

Comment by Ravi Shukla on April 24, 2016 at 3:49pm
आदरणीय राजेश कुमारी जी बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने । दीदी दुसरे शेर में तो हकीकत ही यही है । इसी कायदे से तो कितने शायर अपने अशआर के साथ मशहूर हो गये है । हा हा हा । बढ़िया ग़ज़ल के लिए दिली दाद हाज़िर है । सादर ।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 24, 2016 at 2:43pm

आदरणीया राजेश जी ..एक से बढ़कर एक शेर हैं 

मार देती ये तिश्नगी मुझको,

काश ये मयकदा नहीं होता  लेकिन इस शेर को मैं भली भांति नहीं समझ सका ..इस सुंदर रचना पर हार्दिक बधाई सादर 

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on April 24, 2016 at 2:12pm

बहुत ख़ूब आदरणीया राजेश कुमारी जी, अच्छे अश’आर हुए हैं, दाद कुबूल करें।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
18 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service