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ग़ज़ल :- हज़रत-ए-'मीर' की ज़मीन में

फाइलातुन मफाइलुन फेलुन / फइलुन / फेलान

चैन इस दिल को कब नहीं आता
बाम पर चाँद जब नहीं आता

ख़ुश मिज़ाजी हमारा शैवा है
हमको गैज़-ओ-ग़ज़ब नहीं आता

सब हैं सैराब आपके दर से
एक भी तिश्ना लब नहीं आता

नामा उनका लिये हुए क़ासिद
पहले आता था अब नहीं आता

तल्ख़ लहजा मिरा मुआफ़ करें
बे अदब हूँ अदब नहीं आता

'मीर' साहिब,ग़ज़ल कही लेकिन
शैर कहने का ढब नहीं आता

ज़िक्र तेरा "समर" करेंगें वो
नाम भी ज़ेर-ए-लब नहीं आता

समर कबीर
मौलिक / अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on November 1, 2022 at 11:00am

बहुत शुक्रिय: प्रिय भाई विजय निकोर जी आपकी महब्बतों का मैं दिल से क़ाइल हूँ, सलामत रहें ।

Comment by vijay nikore on November 1, 2022 at 9:45am

प्रिय भाई समर कबीर जी,

कई माह पहले आपकी इस रचना को मैंने मन से सराहा था... आज यहाँ पुन: आया तो निम्न पंक्तियों को बार-बार पढ़ता रहा......

// ज़िक्र तेरा "समर" करेंगें वो
नाम भी ज़ेर-ए-लब नहीं आता //

... बहुत ही खूबसूरत ख़्याल पेश किया है आपने। बधाई...और बधाई।

Comment by Samar kabeer on July 8, 2022 at 4:28pm

जनाब लक्ष्मण धामी जी आदाब, सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत शुक्रिय: ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 8, 2022 at 4:14pm

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। बेहतरीन गजल हुई है। हार्दिक बधाई।

Comment by Samar kabeer on July 6, 2022 at 1:32pm

जनाब कमल पुरोहित जी आदाब, सुख़न नवाज़ीऔर आपकी महब्बत के लिए बहुत शुक्रिय: ।

Comment by Kamal purohit on July 6, 2022 at 12:13pm
वाह सर जी कमाल ग़ज़ल बेजोड़ काफ़िये

इस मिसरे पर मैं सहमत नहीं (बेअदब हूँ अदब नहीं आता)

इसके लिए मैं इतना ही कहना चाहता हूँ

अदब भी जहाँ पर अदब सीखता है
वो दर आपका है वो घर आपका है
Comment by Samar kabeer on June 8, 2016 at 11:43am
जनाब सौरभ पांडे जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 7, 2016 at 8:21pm
’मीर’ साहिब को इंगित कर आपने बहुत सही बात कही है, जनाब समर साहब !
मुबारकबाद !
Comment by Samar kabeer on March 14, 2016 at 5:49pm
जनाब विजय निकोर जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूं, स्नेह बनाये रखें ।
Comment by Samar kabeer on March 14, 2016 at 5:46pm
जनाब सुरेन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूं ।
आगे से लिख दिया करूँगा ,स्नेह बनाये रखें ।

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