For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल :- जन्नत में हर इक चीज़ है,दुनिया तो नहीं है

इक बात है यारों कोई शिकवा तो नहीं है
जन्नत में हर इक चीज़ है दुनिया तो नहीं है

हूँ लाख गुनहगार मगर ऐ मेरे मौला
सर मैंने कहीं और झुकाया तो नहीं है

मैं चाँद के बारे में बस इतना ही कहूँगा
दिलकश है मगर आपके जैसा तो नहीं है

वो आज अयादत के लिये आए हैं मेरी
जो देख रहा हूँ कहीं सपना तो नहीं है

करता ही रहा है ये ख़ता करता रहेगा
इन्सान फिर इंसाँ है फ़रिश्ता तो नहीं है

सर मैं भी झुकाता हूँ तेरे सामने लेकिन
सजदा मेरा,शब्बीर का सजदा तो नहीं है

"समर कबीर"
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 919

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on September 25, 2017 at 10:23pm
जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल आपको पसंद आई लिखना सार्थक हुआ,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on September 25, 2017 at 10:20pm
जनाब श्री सुनील जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
आपकी बहुत याद आ रही है ।
Comment by Mahendra Kumar on September 25, 2017 at 8:49pm

इक बात है यारों कोई शिकवा तो नहीं है
जन्नत में हर इक चीज़ है दुनिया तो नहीं है ...वाह!

मैं चाँद के बारे में बस इतना ही कहूँगा
दिलकश है मगर आपके जैसा तो नहीं है ...ग़ज़ब!

क्या ही शानदार ग़ज़ल कही है आपने आ. समर सर. शेर दर शेर दिल से दाद के साथ मुबारक़बाद क़ुबूल कीजिए. सादर.

Comment by shree suneel on December 5, 2015 at 8:34pm
जन्नत में हर इक चीज़ है दुनिया तो नहीं है.. क्या कहने!
आदरणीय समर कबीर सर जी, ख़ूबसूरत ग़ज़ल.
मैं चाँद के बारे में बस इतना ही कहूँगा
दिलकश है मगर आपके जैसा तो नहीं है... ख़ूब.. ख़ूब
हार्दिक बधाई आपको आदरणीय इस प्रस्तुति पर. सादर
Comment by Samar kabeer on December 3, 2015 at 10:46pm
जनाब नादिर ख़ान जी,आदाब,उत्साहवर्धन प्रतिक्रिया,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on December 3, 2015 at 10:42pm
बहना राजेश कुमारी जी,आदाब,आशुतोष जी की बात का मतलब तो आशुतोष जी ही बता सकते हैं,ग़ज़ल में शिर्कत ,उत्साह वर्धन प्रतिक्रिया,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on December 3, 2015 at 10:37pm
जनाब मिथिलेश वामनकर जी,आदाब,उत्साहवर्धन प्रतिक्रिया ,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by नादिर ख़ान on December 3, 2015 at 12:48pm


उफ़्फ़ क्या लिखा है आदरणीय समर साहब दिल निकाल के रख दिया । हर शेर लाजवाब है|

आपकी ग़ज़लगोई के क्या कहने, इस विधा के माहिर उस्ताद हैं आप .....


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 3, 2015 at 12:39pm

आ० समर भाई जी ,हर बार की तरह एक जबरदस्त ग़ज़ल कही  है  मतले से मकते तक बेहतरीन  इन शेरोन की तो बात ही क्या

मैं चाँद के बारे में बस इतना ही कहूँगा
दिलकश है मगर आपके जैसा तो नहीं है---वाह्ह्ह्ह 

करता ही रहा है ये ख़ता करता रहेगा
इन्सान फिर इंसाँ है फ़रिश्ता तो नहीं है---कमाल का शेर 

 दिल से ढेरों दाद  प्रेषित है |

नीचे आसुतोष जी की टिपण्णी पढ़ी तथा आ० रवि जी का प्रतिउत्तर भी

आसुतोष जी का एक शब्द 'मगर' न जाने क्या कहना चाहता है मैं भी जानने  की इच्छुक हूँ ----

इस स्तर पर आपकी अभिवयक्ति काफी सुन्दर और सार्थक है. मगर ग़ज़ल लिखने की विधि काफी कठिन है क्यूंकि मैं खुद उसे सिख रहा हूँ|


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 3, 2015 at 4:51am

वाह वाह वाह क्या लाज़वाब मतला हुआ है..... सिर धुन रहा हूँ इस मतले पर 

पहला शेर भी उसी स्तर का .... लाज़वाब

चाँद वाला शेर तो कमाल है आपकी उस्तादी दिख रही है इस शेर में 

हे भगवान् किस किस शेर की तारीफ़ करूँ..... अभी समरा का जादू सिर चढ़ कर बोल रहा है और उस पर ये लाज़वाब ग़ज़ल 

आदरणीय उस्ताद जी बस नमन आपको 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Jun 12
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Jun 11

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Jun 5
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service