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ग़ज़ल : हुई जो खबर नाम चलने लगा है

हुई जो ख़बर नाम चलने लगा है ।

ये सारा जहां  हमसे जलने लगा है ।।

 

यहां झूठ से सबको नफरत है फिर भी ।

है किसकी ये शह जो मचलने लगा है ।।

न तुम आग उगलो न मै ज़ह्र घोलूं  ।

ये सोचें लहू क्‍यूँ उबलने लगा है ।।

बुरे वक्त में लोग करते है जुर्रत ।

हुई शाम सूरज भी ढलने लगा है ।।

तुम्‍हें देखते ही  हमारी कबा से ।

उदासी का आलम पिघलने लगा है ।।

 

अज़ल से वही है ज़फ़ा का बहाना ।

 कि मौसम के जैसा बदलने लगा है ।।

 

ये सूखे शज़र छांव देने लगे फिर ।

कि घर का भी मंज़र बदलने लगा है ।।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on September 17, 2015 at 4:25am
आदरणीय रवि जी एक और शानदार ग़ज़ल। दिल से दाद कुबूल फरमाएं।
Comment by Samar kabeer on September 16, 2015 at 11:01pm
जनाब रवि शुक्ल जी,आदाब,आपकी ग़ज़ल सुनकर जो लुत्फ़ हासिल हुवा वो कभी कभी हासिल होता है ,वाह बहुत ख़ूब ,शानदार,दिल बाग़ बाग़ हो गया,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं ।
Comment by shree suneel on September 16, 2015 at 9:19pm
ये सूखे शज़र छांव देने लगे फिर ।
कि घर का भी मंज़र बदलने लगा है... ख़ूब! बहुत ख़ूब!
आदरणीय रवि शुक्ला जी, इस शानदार ग़ज़ल के लिये हार्दिक बधाई आपको. सादर.
Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on September 16, 2015 at 5:53pm

बुरे वक्त में लोग करते है जुर्रत ।

हुई शाम सूरज भी ढलने लगा है ।।

बहुत ख़ूब आ०!ढ़ेरों दाद कबूल करें.

Comment by मनोज अहसास on September 16, 2015 at 3:12pm
बहुत खूब सर
आपको इस ग़ज़ल के लिए बधाई
सक्रिय सदस्य चुने जाने के लिए बधाई

इस ग़ज़ल को
तेरे प्यार का आसरा चाहता हूँ

पर गुनगुनाया बहुत बढ़िया लगा
सादर
Comment by amod shrivastav (bindouri) on September 16, 2015 at 2:36pm
जी सर सादर आभार
Comment by Ravi Shukla on September 16, 2015 at 2:21pm

आदरणीय मुकेश जी आपकी उत्‍साहजनक टिप्‍पणी से उत्‍साहित है हम । सादर

Comment by Ravi Shukla on September 16, 2015 at 2:21pm

आदरणीय आमोद जी प्रयास पसंद आया धन्‍यवाद आपका

Comment by Ravi Shukla on September 16, 2015 at 2:20pm

आदरणीय मदन मोहन जी ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति का बहुत बहुत आभार

Comment by Ravi Shukla on September 16, 2015 at 2:20pm

आदरणीय राहुल जी ग़ज़ल आपको पसंद आई आभार स्‍वीकार करें ।

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