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बेटियाँ कभी उदास नहीं होतीं !!


वो तो होती हैं-

सृष्टि की अद्भुत कल्पना 

आनंददायक भावना।
वो रहती हैं-

आँगन की हवाओं में

पिता की दुआओं में ।
तभी तो खिल जाती है 
एक स्नेहिल मुस्कान 

हर लेती जो कितनी थकान।

बांटती है हमेशा-

खुशियों की सत्त्व-दीप्ति

मधुर जीवन संस्कृति।

वैसी कोई दूजी सुवास नहीं होती ।

क्योकिं बेटियाँ कभी उदास नहीं होतीं !!


वो तो दूर करती हैं-

उदासी, दोनों ही घरों की 

बनाती है जीवन इन्द्रधनुषी।
बेटियाँ हर लेती हैं- 
पीड़ा, संतप्त मन की 

घर की, आँगन की। 
और देती हैं हमें एक -
अलौकिक आनंद की अनुभूति

जैसे बनकर कोई सुधा-सूति।
वही तो होतीं हैं,

जब माँ पास नहीं होतीं ।
क्योकिं बेटियाँ कभी उदास नहीं होतीं !!

मौलिक एवम अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by विनय कुमार on July 8, 2015 at 6:44pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय मनोज कुमार अहसास जी ..

Comment by मनोज अहसास on July 8, 2015 at 1:06pm
बहुत खूब
आपने अतिसुन्दर भाव शब्दों में बांध दिए है
सादर
Comment by विनय कुमार on July 7, 2015 at 5:55pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय मोहन सेठी इंतज़ार जी , सच में आदरणीय मिथिलेश जी के संशोधन के बाद तो बेहतरीन हो गयी है..

Comment by विनय कुमार on July 7, 2015 at 5:52pm

मैं तो नमन करता हूँ आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी आपकी रचना धर्मिता को | आपने इतना समय दिया इसे और आपके संशोधन/ परिष्करण के बाद तो ये एकदम खिल उठी है | दरअसल बेटियों के लिए कुछ भी लिख दिया जाये तो वो दिल को छू लेता है और मुझे भी बेटी की याद आई और मैंने कुछ आड़ा तिरछा लिख दिया | आप जैसे अभ्यासी होने चाहियें आदरणीय तो दूसरों को राह दिखा सकें | दिल से आभार आपका..

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on July 7, 2015 at 5:15pm

आदरणीय विनय जी सुंदर एवं भावपूर्ण रचना के लिये हार्दिक बधाई और आदरणीय मिथिलेश जी ने जो रंग उसमें भरा है वो ग़जब है.... आप दोनों को नमन 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on July 7, 2015 at 2:54pm

आदरणीय विनय जी बहुत सुन्दर और भावपूर्ण कविता हुई है. इस बेहतरीन प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.

कविता में मुझे कुछ संभावनाएं लगी और नया अभ्यासी होने के नाते थोड़ा बहुत रचना पर आयं बायं कर लेता हूँ इसलिए इस पर मैंने प्रयास किया है. यदि इस कविता को थोड़ा इस रूप में सुगठित किया जावें तो आपके भाव सम्प्रेषण का आनंद दुगुना हो जाएगा. पाठक जो अभ्यासी भी है का प्रयास --->

बेटियाँ कभी उदास नहीं होतीं !!


वो तो होती हैं-

सृष्टि की अद्भुत कल्पना 

आनंददायक भावना।
वो रहती हैं-

आँगन की हवाओं में

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तभी तो खिल जाती है 
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हर लेती जो कितनी थकान।

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वो तो दूर करती हैं-

उदासी, दोनों ही घरों की 

बनाती है जीवन इन्द्रधनुषी।
बेटियाँ हर लेती हैं- 
पीड़ा, संतप्त मन की 

घर की, आँगन की।
और देती हैं हमें एक -
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जैसे बनकर कोई सुधा-सूति।
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जब माँ पास नहीं होतीं ।
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