For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गीत -- पूछता है अब विधाता - ( गिरिराज भंडारी )

रोक नदिया

तोड़ पर्वत

तू धरा को क्या बनाता

पूछता है , अब विधाता

 

देख कुल्हाड़ी चलाता 

कौन अपने पाँव में ही

कंटकों के बीज बोता

रास्तों में , गाँव मे ही

व्यर्थ सपनों के लिये क्यों आज के सच को  गवांता

तू धरा को क्या बनाता , पूछता है अब विधाता

 

इक नियम ब्रम्हाण्ड का है

ग्रह सभी जिसमें चले हैं

है धरा की गोद माँ की

खेल जिसमे सब पले हैं

माँ पहनती उस वसन में , आग कोई है लगाता 

तू धरा को क्या बनाता , पूछ्ता है अब विधाता

 

है सरलता, राज पथ सी

है तरलता एक  सच ही         

क्या विनाशक सर चढ़ा बन

चुन लिया है  पर कुपथ ही

क्यों सहज से रास्ते पर  तू अभी भी चल न पाता

तू धरा को क्या बनाता , पूछता है अब विधाता

******************************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित

Views: 806

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 15, 2015 at 10:02am

आदरणीय बड़े भाई अखिलेश जी , उत्साह वर्धन के लिये आपका आभारी हूँ ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 15, 2015 at 10:01am

आदरनीय निर्मल नदीम भाई , हौसला अफज़ाई का दिली शुक्रिया ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 15, 2015 at 10:00am

आदरणीय विजय भाई , उत्साहवर्धन के लिये आपका अबहुत आभार ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 15, 2015 at 10:00am

आदारणीय जितेन्द्र भाई . आपका बहुत आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on May 15, 2015 at 2:14am

आदरणीय गिरिराज सर बहुत सुन्दर गीत लिखा है आपने 

बहुत बहुत बधाई 

व्यर्थ सपनों के लिये क्यों आज के सच को  गवांता

माँ पहनती उस वसन में , आग कोई है लगाता

क्यों सहज से रास्ते पर  तू अभी भी चल न पाता

तू धरा को क्या बनाता , पूछता है अब विधाता

बहुत सुन्दर 

Comment by shree suneel on May 14, 2015 at 10:07pm
है धरा की गोद माँ की
खेल जिसमे सब पले हैं
माँ पहनती उस वसन में , आग कोई है लगाता
तू धरा को क्या बनाता , पूछ्ता है अब विधाता/
आदरणीय गिरिराज सर, इस सार्थक, सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें. बहुत सुन्दर!
Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 14, 2015 at 9:54pm

आदरणीय गिरिराज भाईसाब ,, बिधाता का सवाल के माध्यम से सचेत करती इस रचना के लिए हार्दिक बधाई सादर 

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on May 14, 2015 at 1:55pm

बहुत ही बेहतरीन!समसामयिक ज्वलंत रचना हुयी आदरनीय! अभिनन्दन!

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on May 14, 2015 at 12:05pm

पशु पक्षी हमारी तरह बोल पाते तो वे प्रकृति और पर्यावरण पर हमारी क्लास ज़रूर लेते और  प्यार से समझाते एक गुरु की तरह और कुछ स्वार्थी और उदंड लोगों को सींग और चोंच मारकर ।

हार्दिक बधाई , प्रिय  गिरिराज भाई 

Comment by Nirmal Nadeem on May 14, 2015 at 11:43am
बहुत सुन्दर क्या बात है।बधाई।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
yesterday
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service