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'मस्तों के कलन्दर भोले पिया' (जान’ गोरखपुरी)

२१२२   २१२२   २१२२   २१२२    २२१२

तेरी महफ़िल के दिवाने को सनम और कोई महफ़िल भाती नही
तू जिसे जलवा दिखा दे,उसको अपनी याद भी फिर आती नही
***
तेरी मस्ती में मै हूँ सरमस्त,मस्तों के कलन्दर भोले पिया
तेरी मूरत यूँ छपी दिल में के,सूरत कोई दिल छू पाती नही
***
यूँ जिया में है भरी झंकार के,धड़कन मेरी पायल बन गयीं
मन थिरकता वरना क्यूँ ऐसे,मिलन के गीत सांसें गाती नही
****
आफताबो-माहताबो-कहकशां रौशन हैं तेरे ही नूर से
इश्क़ बिन तेरे,न टरता कण भी,दुनिया क्षण को भी चल पाती नही
***
वारि-वारी जाऊ तेरे रंगरेजा, ओ-मुसव्विर-ए-कायनात
कोई शय ऐसी नही जिसमें, तेरी जादूगरी भरमाती नही

*******************************************
मौलिक व् अप्रकाशित (c) ‘जान’ गोरखपुरी
*******************************************

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Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on April 18, 2015 at 8:48pm

आ० प्रतिभा जी मुक्त हृदय से प्रसंशा कर उत्साहवर्धन करने के लिए शुक्रिया!आभार!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on April 18, 2015 at 8:47pm

आदरणीय Dr. Vijai Shanker सर बहुत बहुत आभार!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on April 18, 2015 at 8:46pm

आदरणीय समर कबीर सर!आपकी सराहना ने रचना को जो मान दिया है! उसका मै दिली शुक्रगुजार हूँ! हार्दिक आभार!

Comment by Dr. Vijai Shanker on April 16, 2015 at 4:55pm
सुन्दर एवं सराहनीय प्रयास , प्रिय कृष्ण मिश्रा जी, बधाई, सादर।
Comment by Samar kabeer on April 16, 2015 at 2:44pm
जनाब "जान" गोरखपुरी साहिब ,आदाब,अच्छी ग़ज़ल से नवाज़ा है आपने,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं |
Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on April 16, 2015 at 2:27pm

आ० गिरिराज सर! रचना पर आपकी इस प्रतिक्रिया से मन गदगद हो गया,दिन बन गया आज का....गुरुवर आपके मार्गदर्शन के अनुसार ही और अधिक समय और संयम से रचनाकर्म में रत हुआ हूँ,उसी आशीर्वाद का परिणाम है ये रचना!अभिनन्दन आदरणीय!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on April 16, 2015 at 2:15pm

इस गज़ल को क़व्वाली गायनशैली  में लिखने का प्रयास किया है,गुरुजनों से मार्गदर्शन निवेदित है!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 16, 2015 at 2:15pm

आदरणीय कृष्णा भाई , लाज्वाब रूहानी गज़ल के लिये आपको दिली बधाइयाँ ॥

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on April 16, 2015 at 2:12pm

आदरणीय गोपाल सर! गुरुवर मेरा प्रयास आपको सार्थक लगा जानकर मन हर्षित हुआ!आभार आदरणीय!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on April 16, 2015 at 2:09pm

आ० shyam narain जी रचना आपको पसंद आई!लेखन सार्थक हुआ,हृदयतल से आभार!

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