For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

किसको रोऊँ मैं दुखड़ा ?

ग्रीष्म में तपता हिमाचल, घोर बृष्टि हो रही
अमृत सा जल बन हलाहल, नष्ट सृष्टि हो रही
काट जंगल घर बनाते, खंडित होता अचल प्रदेश
रे नराधम, बदल डाले, स्वयम ही भू परिवेश
धर बापू का रूप न जाने, किसने लूटा संचित देश
मर्यादा के राम बता दो, धारे हो क्या वेश
मोड़ी धारा नदियों की तो, आयी नदियाँ शहरों में
बहते घर साजो-सामान, हम रात गुजारें पहरों में.
आतुर थे सारे किसान,काटें फसलें तैयार हुई
वर्षा जल ने सपने धोये, फसलें सब बेकार हुई
लुट गए सारे ही किसान,अब नहीं फायदा खेती में
मिहनत करते हाड़ तोड़ते, बीज मिट गए सेती में.
इससे अच्छा लो जमीन अब, रोजगार दो मुझको भी,
काम महीने भर करावा लो, दो पगार अब मुझको भी
चाहे कोई खेल खेला लो, गीत खुशी के गाऊंगा
चला मशीनें घर आऊंगा, बच्चों के संग खाऊँगा
कुछ भी कर लो मेरे आका, नहीं सहन अब होता है
नही चाहता मरना असमय, बच्चों का दुख होता है
ऐसी क्या सरकार बनेगी, समझे ऐसे मसलों को  
लागत पर ही मूल्य नियत हो, बीमित कर दे फसलों को  
हम  भी आखिर मतदाता हैं, कहलाते हैं अन्नदाता ,
नारों से न पेट भरेगा, हमें समझ में है आता
मिहनतकश हूँ सो लेता हूँ, चाहे बिस्तर हो रुखड़ा,
नहीं बुझेगी जठराग्नि तो, किसको रोऊँँ मैं दुखड़ा?

(मौलिक व अप्रकाशित)

- जवाहर लाल सिंह  

Views: 639

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on April 2, 2015 at 8:57am

आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी, उत्साह बढ़ाने के लिए आपका अतिशय आभार! सादर! 

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on April 2, 2015 at 8:57am

आदरणीया प्रतिभा त्रिपाठी जी, सादर अभिवादन! उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया हेतु आभार!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on April 2, 2015 at 8:56am

आदरणीय श्री श्याम नारायण वर्मा जी, उत्साह बढ़ाने के लिए अतिशय आभार!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on April 2, 2015 at 8:55am

आदरणीय डॉ. विजय शंकर सर, उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया का हार्दिक आभार ...आपने पंक्तिया चिन्हित कर रचना का मान बढाया है ...सादर! 

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on April 2, 2015 at 8:52am

आदरणीय श्री गोपाल नारायण सर, सादर अभिवादन! आपकी उत्साहवर्धक प्रेअत्क्रिया से मन प्रफ्फुल्लित हो गया! सादर!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on April 2, 2015 at 12:01am

आदरणीय जवाहर जी  अच्छी प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई...... सादर

Comment by Shyam Narain Verma on April 1, 2015 at 4:48pm
भावो  से ओत प्रोत इस रचना के लिए  हार्दिक धन्यवाद i
Comment by Dr. Vijai Shanker on April 1, 2015 at 4:42pm
धर बापू का रूप न जाने, किसने लूटा संचित देश
मर्यादा के राम बता दो, धारे हो क्या वेश ……
सुन्दर , बधाई ,आदरणीय जवाहर लाल सिंह जी , सादर।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on April 1, 2015 at 2:00pm

आ० जवाहरलाल जी

अच्छी रचना हुयी है . आपको बधायी. सादर .

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन ।फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
5 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
11 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
11 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
15 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
yesterday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service