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रक्षाबंधन (लघुकथा)

“छोटी आज सुबह से ही सज धज कर बैठी थी, उसने बहुत ही सुन्दर राखी खरीद कर पहले ही रख ली थी, थाली में रोली, चावल, दीया- बाती और मिठाई सजा कर बैठी थी, आज कई दिनों बाद उसका राजा भईया आ रहा था, आज ‘रक्षाबंधन’ जो था !”

“तभी उसके मोबाइल फ़ोन की घंटी बजी ,एक एस.ऍम.एस था.. “हे छोटी ,हैप्पी रक्षाबंधन टू यू”, सॉरी आज नहीं आ पाऊंगा तुम्हारी भाभी को लेकर ससुराल आ गया हूँ , मॉम, डैड को हेलो कहना , लव यू बाय !”

“छोटी ने लैपटॉप उठाया ,एक अटैचमेंट बनाया ,मेल किया , भाई को एस.ऍम.एस किया “भईया, राखी मेल में भेज दी है ,प्रिंटआउट निकाल कर बाँध लेना , लव यू टू !”

“ इधर मिठाई मैं न जाने कहाँ से चीटियाँ आ गयीं थी !”

 

© हरि प्रकाश दुबे

"मौलिक व अप्रकाशित”       

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Comment by Hari Prakash Dubey on February 8, 2015 at 10:33am

आदरणीया वंदना जी इस लघुकथा पर आपकी प्रतिक्रिया ,प्रोत्साहन के लिए आपका हार्दिक  धन्यवाद ! सादर 

Comment by Hari Prakash Dubey on February 8, 2015 at 10:31am

आदरणीया राजेश कुमारी जी ,आपकी बधाई सहर्ष शिरोधार्य है. आपका ह्रदय से आभार, स्नेह व् आशीर्वाद बनाये रखियेगा ,सादर!

Comment by Hari Prakash Dubey on February 8, 2015 at 10:28am

आदरणीय अनुराग गोयल जी ,इस लघुकथा पर आपकी प्रतिक्रिया ,प्रोत्साहन के लिए आपका धन्यवाद !

 

Comment by Hari Prakash Dubey on February 8, 2015 at 10:25am

आदरणीय खुर्शीद खैरादी साहब आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

Comment by Hari Prakash Dubey on February 8, 2015 at 10:22am

आदरणीय गुमनाम भाई आपका  हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ ,हार्दिक धन्यवाद !

Comment by Hari Prakash Dubey on February 8, 2015 at 10:21am

आदरणीय वीरेन्द्र वीर मेहता जी , आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

Comment by Hari Prakash Dubey on February 8, 2015 at 10:20am

आदरणीय जितेन्द्र पस्टारिया सर, आपके प्रेरणादायक शब्दों के लिए आपका हार्दिक आभार ! सादर

Comment by Hari Prakash Dubey on February 8, 2015 at 10:19am

आदरणीय गिरिराज भंडारी सर,आपकी उत्साहवर्धक और प्रेरणादायी टिप्पणी के लिए हृदय से धन्यवाद , सादर ।

Comment by Hari Prakash Dubey on February 8, 2015 at 10:18am

आदरणीया सविता मिश्रा जी, रचना की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार ! सादर 

Comment by Hari Prakash Dubey on February 8, 2015 at 10:17am

आदरणीय विश्व राज सिंह राठौर जी, आपका  बहुत बहुत धन्यवाद  ।

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