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अतुकांत - आपसी ताप से जलती टहनियाँ ( गिरिराज भंडारी )

आपसी ताप से जलती टहनियाँ

************************

आँधियों की छोड़िये

हवा थोड़ी भी तेज़ बहे, स्वाभाविक गति से

टहनियाँ रगड़ खाने लगतीं हैं

एक ही वृक्ष की

आपस में ही

पत्तियाँ और फूल न चाहते हुये भी

कुसमय झड़ जाने के लिये मजबूर हो जाते हैं

 

टहननियों की अपनी समझ है ,

परिभाषायें हैं खुशियों की ,

गमों की

फूल और पत्तियाँ असहाय

जड़ें हैरान हैं , परेशान हैं 

वो जड़ें ,

जिन्होनें सब टहनियों के लिये एक जैसी खींची थी ,

भेजी थी ,

जीवनी शक्ति

धरती की गहराइयों तक जा कर  

बाहर के उजाले का मोह त्याग स्वीकार किये,

घुप अँधेरे

 

क्या यही देखने के लिये

कि जल जायें टहनिययाँ उसके ही तने से लगी हुई

आपसी रगड़ से उत्तपन्न ताप से

*****************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित

Views: 583

Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 18, 2015 at 7:46am

आदरणीया प्रतिभा जी , रचना के अनुमोदन के लिये आपका शुक्रिया ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 15, 2015 at 1:18pm

आदरणीय श्याम नारायण भाई  , आपका हार्दिक आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 15, 2015 at 1:17pm

आदरणीय जवाहर भाई , रचना की सराहना कर उत्साह वर्धन के लिये आप्का हार्दिक आभार


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 15, 2015 at 1:16pm

आदरणीय सौरभ भाई , आपसे ऐसी सराहना पाके रचना धन्य हो गई , मेरी मेहनत सफल हुई । आपका हार्दिक आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 15, 2015 at 1:14pm

आदरणीय मिथिलेश भाई , उत्साह वर्धन के लिये तहे दिल से शुक्रिया ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 15, 2015 at 1:14pm

आदरणीय हरि प्रकाश भाई , आपका हार्दिक आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 15, 2015 at 1:13pm

आदाणीया आशा जी , रचना की सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 15, 2015 at 1:12pm

आदरणीय सोमेश भाई , उत्साह वर्धन के लिये आपका हार्दिक आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 15, 2015 at 1:11pm

आदरणीय खुर्शीद भाई , आपकी प्रतिक्रिया से  मेरा मनोबल बढ़ा  है , सराहना के लिये आपका आभार ।

Comment by Shyam Narain Verma on January 15, 2015 at 9:59am

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ... सादर बधाई

कृपया ध्यान दे...

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