For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सूर्य तो बस सुधा कूप है/ नवगीत (मिथिलेश वामनकर)

प्रेम की गुनगुनी धूप है

सूर्य तो बस सुधा कूप है

 

हंस रहा रश्मियाँ भेजकर

तीर्थ के दीप सा बल रहा

कष्ट में पुष्प सा खिल गया

अनगिनत विश्व का छंद है

कांति का शांति का रूप है

सूर्य तो बस सुधा कूप है

 

ब्रह्म के कण विचरते हुए

बल तेरा मिल गया हर दिशा

शून्य में रूप तू इष्ट का

अस्त पर व्यस्त तू फिर कहीं

कर्म का धर्म का यूप है

सूर्य तो बस सुधा कूप है

 

सृष्टि के पुत्र का पालना

तप्त भी तो मनुज के लिए

सिंदूरी सिंदूरी थपकियाँ

कोपलें, गर्भ की सर्जना

मन प्रजा में छिपा भूप है

सूर्य तो बस सुधा कूप है

(मौलिक व अप्रकाशित)

मिथिलेश वामनकर 

Views: 402

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on June 29, 2015 at 3:35am

हार्दिक आभार आदरणीय आशुतोष जी 

ये मेरा पहला नवगीत है 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 28, 2015 at 3:05pm

आदरणीय मिथिलेश जी ..आपके नव गीत आज ही पढने का मौका मिला ..इससे पहले मैंने सिर्फ आपकी ग़ज़लें ही पढ़ी हैं ढेर सारी बढ़ाई के साथ सादर 

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on April 30, 2015 at 10:53am

बहुत सुन्दर मनोहर। अच्छा लेखन
जय  श्री राधे
भ्रमर ५


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 21, 2014 at 5:18pm
आदरणीय गिरिराज सर, आपके निर्देशानुसार मात्रात्मक त्रुटियों में सुधार के प्रयास करता हूँ।
एक निवेदन कृपया सम्बोधन के अधिकार से वंचित न करें। आप सभी मेरे लिए साहित्य की दुनिया में सीनियर है। मेरे पास सीनियर के लिए सर्वाधिक सहज सम्बोधन सर ही है। सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 21, 2014 at 4:08pm

आदरणीय मिथिलेश भाई , आपने अपने गीत हो 15 मात्रा मे साधा है , ज्यादा तर पंक्तियाँ 15 मात्राओं की हैं । लेकिन  -

बल तेरा मिल गया हर दिशा   -- 2+4+2+3+2+3  -- 16 मात्रायें  और

सिंदूरी सिंदूरी थपकियाँ  ---       6+6 +5  --             17  मात्रायें  --  यही दो जगह मुझे शंका हुई है ।

आदरणीय, आपको गंभीर प्रयास करते देख खुशी होती है , और इसी लिये कुछ दिखता है तो कह देता हूँ , यहाँ सब की तरह मै भी सीख रहा हूँ , मुझे सर न कहा करें , भाई , बड़ा भाई , मित्र काफी है । अभी बहुत सी कमियाँ मुझमें बाक़ी है जिसे शायद मै दूर भी न कर पाऊँ , मै भी प्रयास रत हूँ सभी मित्रों की तरह । सादर निवेदन ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 21, 2014 at 2:35pm
आदरणीय गिरिराज सर, आपको नवगीत पसंद आया आभार, ये मेरा इस विधा में प्रथम प्रयास था
जिन शब्दों से लयता भंग हो रही है उन्हें मैं पकड़ नहीं पारारा हूँ। कृपया चिन्हित करने की कृपा करे सर। आपका बहुत बहुत आभार और हार्दिक धन्यवाद आपका स्नेह सदैव बना रहे सर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 21, 2014 at 12:03pm

बहुत सुन्दर गीत रचना की है आदरणीय मिथिलेश भाई , हार्दिक बधाई स्वीकार करें । मात्रा विन्यास में गड़बड़ी एक दो जगह है , जिससे गेयता बाधित ज़रूर है , आपके लिये सुधार लेना छोटी सी बात है  मुझे विश्वास है ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 20, 2014 at 10:19pm

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय सोमेश कुमार जी, रचना को अनुमोदित करने के लिए.

Comment by somesh kumar on December 20, 2014 at 7:35pm

सूर्य तो बस सुधा कूप है | निश्नदेह जीवन के अविष्कार से लेकर उसके अंत तक सूर्य है,चाहे वैज्ञानिक तर्क से देखें ,श्रद्धा से या काव्य रूप में ,पर सूर्य या उसका प्रतिबिम्ब अनिवार्य है |सुंदर प्रस्तुति-हेतु बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 20, 2014 at 6:55pm
आदरणीय हरि प्रकाश दुबे जी इस नए प्रयास की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार। आपका रचना गुजरना व् अनुमोदन उत्साहवर्धक है लिखना सार्थक हुआ बहुत बहुत बहुत धन्यवाद

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Dr. Vijai Shanker commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सदमे में है बेटियाँ चुप बैठे हैं बाप - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण सिंह धामी जी , इस गंभीर, सामयिक और शिक्षाप्रद प्रस्तुति के लिए बधाई , सादर।"
2 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कठिन बस वासना से पार पाना है-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल )
"आदरणीय लक्ष्मण सिंह धामी जी , इस गंभीर प्रेरक प्रस्तुति के लिए बधाई , सादर।"
2 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ : ....
""आदरणीय   लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया…"
9 hours ago
Usha commented on Usha's blog post ज़िन्दगी - एक मंच । (अतुकांत कविता)
"आदरणीय श्री लक्ष्मण जी, कविता आपको पसंद आई, ह्रदय से आपका आभार। सादर।"
14 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post आक्रोश
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी उत्साह वर्धन के लिए आपका दिल से आभार"
15 hours ago
Manan Kumar singh posted a blog post

अप टू डेट लोग(लघुकथा)

'भूं  भूं...भूं' की आवाज सुन भाभी भुनभुनाई-- ' भोरे भोरे कहां से यह कुक्कुड़ आ गया रे?' '  कुक्कुड़…See More
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

कठिन बस वासना से पार पाना है-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल )

१२२२/१२२२/१२२२अमरता देवताओं  का  खजाना हैमनुज तूने कभी उसको न पाना है।१।यहाँ मुँह तो  बहुत  पर  एक…See More
16 hours ago
SALIM RAZA REWA posted a blog post

गुलशन-ए -दिल में टहलने वो अगर आएँगे   - सलीम रज़ा

2122 1122 1122 22गुलशन-ए -दिल में टहलने वो अगर आएँगे      फूल जितने है वो क़दमों में बिखर…See More
16 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दो मुक्तक (मात्रा आधारित )......

दो मुक्तक (मात्रा आधारित )......शराबों में शबाबों में ख़्वाबों में किताबों में। ज़िंदगी उलझी रही…See More
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post आक्रोश
"आ. भाई छोटेलाल जी, सादर अभिवादन। समसामयिक विषय पर उत्तम दोहे रचे हैं । हार्दिक बधाई।"
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Usha's blog post ज़िन्दगी - एक मंच । (अतुकांत कविता)
"आ. ऊषा जी, अच्छी कविता हुई है । हार्दिक बधाई।"
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.
"आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन। बहुत ही उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
16 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service