For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

शजर की हाय ही काफ़ी अगर बोला तो क्या होगा (ग़ज़ल 'राज')

1222  1222   1222  1222

नहीं होता तो क्या होता अगर होगा तो क्या होगा

कभी तुमने बचाया क्या अभी खोया तो क्या होगा

 

जमाने को सिखाया है हुनर तुमने यही अब तक

वफ़ा करके कभी खुद को मिले धोखा तो क्या होगा 

 

किसी की जिन्दगी में तुम उजाला कर नहीं सकते

अगर खुर्शीद भी दिन में न अब जागा तो क्या होगा 

 

चले हो आबशारों को जलाने आग से अपनी

समंदर ने तुम्हारा रास्ता रोका तो क्या होगा 

 

लिए वो हाथ में पत्थर कभी फेंका था जो तुमने 

तुम्हारा आईना दिल का  अगर टूटा तो क्या होगा 

 

बरी हो तुम भले  ही आज  अपने इन गुनाहों से

अदालत से ख़ुदा की फेंसला आया तो क्या होगा

 

बहुत बर्दाश्त करता है न कहता कुछ जुबाँ से वो

शजर की हाय ही काफ़ी अगर बोला तो क्या होगा

(मौलिक एवं अप्रकाशित )

Views: 853

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 19, 2014 at 12:11pm

वाह वाह वाह !! मोती जड़ दिए अश'आर में मा० राजेश कुमारी जी। शेअर मुकम्मिल और दिल में उतरने की कैफियत का हुआ है। बहुत बहुत बधाई स्वीकारें इस लाजवाब ग़ज़ल के लिए।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 19, 2014 at 9:52am

आदरणीया राजेश जी , बहुत बेहतरीन ग़ज़्ल कही है ! हर शे र अपना जवाब खुद है , वाह ! दिली मुबारकबाद कुबूल करें ।

Comment by somesh kumar on November 19, 2014 at 8:49am

सुंदर गज़ल के लिए बधाई ,दीदी 

Comment by pooja yadav on November 19, 2014 at 8:46am
/फैसला खुद की अदालत से आया तो क्या होगा/ बहुत खूब।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on November 19, 2014 at 7:38am
बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है दीदी हर शे'र पसंद आया दिल से दाद दे रहा हूँ कूबूल फरमाएँ

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

सुरेश कुमार 'कल्याण' posted a blog post

कुंडलिया

दरियादिल हो बाप जब, करता कन्यादान।दयावान भगवान हो, रखता उसका मान।रखता उसका मान, भात नरसी-सा भरता।आठ…See More
34 minutes ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय शाहज़ाद उस्मानी साहब , नमस्कार। हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया।"
1 hour ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"अजय गुप्ता जी, आपका सुझाव भी अच्छा लगा, इस पर विचार करती हूॅं आपने दूसरे मिसरे पर भी ध्यान दिया।…"
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"आदाब। सत्य और सत्य के चारों ओर के वातावरण, परिदृश्य और हालात शाब्दिक करती रचना हेतु हार्दिक बधाई…"
1 hour ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"बहुत शुक्रिया जी "
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदाब। गिरह वाला शे'अर अच्छा लगा जनाब दयाराम मेठानी जी। "
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"वाह। अंतिम शे'अर में बढ़िया प्रयोग आदरणीय अजय जी।"
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदाब। गिरह वाले बढ़िया शे'अर के साथ अच्छी कोशिश। कहते हैं ग़ज़ल को पढ़कर या गाकर देखने से दोष…"
1 hour ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी ,  अति सुंदर , हार्दिक बधाई। आम की ज्यादा तारीफ उचित है। आखिर फलों का राजा…"
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदाब। हमें भी मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीय तिलकराज कपूर जी।"
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदाब। बढ़िया गिरह के साथ अच्छी ग़ज़ल मुहतरमा मंजीत कौर जी।"
1 hour ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय शेख शहजादजी  हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।  छंदोत्सव में आपकी उपस्थिति के लिए पुनः…"
1 hour ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service