For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कुछ दो-चार मरीजोँ, नर्स एक बड़ी-सी खिड़की और क्रीम कलर के बड़े-बड़े पर्दोँ के अलावा उस अस्पताल मेँ मेरे लिए देखने
लायक कुछ भी नही था। ऑपरेशन के तुरन्त बाद मैँ अपने बिस्तर पर पड़ी कराह रही थी। कुछ ग्लूकोज़ की बूँदेँ जो नलियोँ के सहारे रिस-रिस कर मेरे हाथ से होती हुई मेरे शरीर मेँ शामिल हो जाती थी, ने मेरे हाथ को किसी पत्थर की तरह भारी और ठण्डा कर दिया था और मैँ कम्बल से ढ़ककर इसे गरम रखने का नाकाम प्रयास करती। पैर अभी भी सुन्न थे पर कमर का दर्द मुझे अन्दर तक तोड़ देता था मानो मेरी जीजिविषा को खत्म ही करना चाहता था। जब और बर्दाश्त करना नामुकिन हो गया तो मैँने दर्द से तड़पते हुए कहा-
"दीदी मुझे बहुत दऽऽऽर्द...." इतना सुनते ही उस नर्स ने कुछ छोटी-बड़ी दवाईयाँ मेरे मुँह मेँ डाल दी।
-"थोड़ी देर मेँ नीँद आ जाएगी कहकर वो चली गई।"

पर लम्बी बेहोशी के कारण मेरी आँखोँ मेँ नीँद का कोई नाम नही था। बस हताशनिरा-श सी किसी के आने की आस मेँ दरवाज़े को ताकती रहती, पर कौन आता? को अंदर जाने जी आज्ञा नहीं थी अत: मैँ असहाय-सी परिचारिकाओँ के निर्देश मानने को मजबूर थी। जब कुछ नही सूझा तो मैँने फोन मेँ एक नम्बर डायल किया। अभी घण्टी जा ही रही थी कि समय पर नज़र पड़ी।
आह! 12:35 सो गई होगी और मैँने लाल बटन दबा दिया। एक बार फिर हताश-सी होकर उस अकेलेपन से बचने के लिए मैँ आँखेँ मूँदे उसे याद कर ही रही थी कि पास ही रखा मेरा फोन घनघना उठा।

-"हैलो गिल्लू। तू जाग रही थी?"
-"हाँ। पढ़ रही थी। तूने फोन किया न? कैसी है तू और ऑपरेशन कब है?"
-"हो गया वो तो आज ही। गिल्लू मुझे बहुत दर्द हो रहा है। मैँ क्या करूँ?"
आँसुओँ का वो बाँध जो मैँने अब तक सम्हाल रखा था इतना कहते ही अपनी सीमाएँ तोड़कर बहने लगा।
-"डॉक्टर ने क्या कहा? अब तू ठीक तो हो जाएगी न। देख ऐसे रो मत वरना मैँ भी रोने लगूँगी।"
-"नही न, तू मत रो। गिल्लू तू प्लीज़ आ जा ना मेरे पास।"
-"हाँ, तू चुप हो मैँ कल आती हूँ।
-"पक्का न?"
-"हाँ एकदम पक्का।"

यूँ आश्वस्त करके जैसे उसने मेरा सारा दर्द खीँच लिया था या यूँ कहूँ कि दर्द तो उतना ही था पर उसका एहसास कुछ कम हो गया।

"पूजा"
"मौलिक एवं अप्रकाशित"

Views: 1214

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by pooja yadav on December 1, 2014 at 1:40pm

dhanyawaad laxman ji.......

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 20, 2014 at 10:30am

संवेदना भरी मार्मिक कहानी अच्छी लगी | आपको हार्दिक  बधाई 

Comment by pooja yadav on November 19, 2014 at 3:49pm
जी योगराज जी। आपके इस मशवरे पर अवश्य अमल करूँगी। आपकी प्रतिक्रिया हेतु आभारी हूँ।

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 19, 2014 at 11:24am

कहानी कहने का बहुत सुन्दर प्रयास किया है पूजा यादव जी, बधाई स्वीकारें। मंच  रहें एवं सुधीजनों की बातों का संज्ञान लें। शीर्षक किसी  भी रचना का मुखड़ा हुआ करता है, प्रयास करें कि इसका रूप परिपक्व और साहित्यिक ही रहे।

Comment by pooja yadav on November 18, 2014 at 8:23pm
धन्यवाद आदरणीया राजेश कुमारी जी एवं आदरणीय डॉ॰ गोपाल नारायन जी; आपको रचना पसन्द आई मेरा सौभाग्य है।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 18, 2014 at 6:44pm

पूजा जी संवेदना को आपने करीने से सहेजा है  i इसलिए कथा प्रभावपूर्ण है i


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 18, 2014 at 11:07am

सही बात है वक़्त पे रोने को किसी अपने का कांधा मिल जाए तो दर्द कम हो जाता है या आहसास कम हो जाता है ..बहुत अच्छी कहानी ,बधाई आपको पूजा जी 

Comment by pooja yadav on November 17, 2014 at 8:57pm
धन्यवाद किशन कुमार जी।
आपको मेरी रचना पसन्द आई उसके लिए आपका अभिनन्दन है।
Comment by किशन कुमार "आजाद" on November 17, 2014 at 6:04pm
लाजवाब । कुछ नही मेरे पास बोलने को

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
1 hour ago
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Thursday
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service