For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अँधेरी रात में जब दीप झिलमिलाते हैं (गीत) // -- सौरभ

१२१२ ११२२ १२१२ २२

सहज लगाव हृदय में हिलोड़ जाते हैं ।
अँधेरी रात में जब दीप झिलमिलाते हैं ॥

किसी उदास की पीड़ा सजल हृदय में ले
निशा निराश हुई, चुप वृथा पड़ी-सी थी
तथा निग़ाह कहीं दूर व्योम में उलझी
किसी करीब के होने की आस जीती थी

मगर रुकी है कहाँ ज़िन्दग़ी किसी पल भी
इसी विचार को समवेत स्वर में गाते हैं--
अँधेरी रात में जब दीप झिलमिलाते हैं !!

उतावली कोई अल्हड़ झिंझोर दे मणियाँ
कभी लगे कि झरे पारिजात अदबद कर
रसालकुंज अघाया हुआ.. मताया-सा..
कुमारियों की नरम देह झुक गयी लद कर

शकुंतला है इन्हीं वृक्ष, वन-लताओं में  
पुलक-पुकार से दुष्यंत फिर बुलाते हैं !
अँधेरी रात में जब दीप झिलमिलाते हैं !!
 
धरा के अंग पे सुन्दर लगें ये आभूषण
कभी  सुहाग  के  कुंकुम बने निखरते हैं
महावरों की लकीरों-से रच गये, या फिर-  
सुहाग-रंग छुए अंग बन-सँवरते हैं

लगे धरा ये सिहरती हुई नयी दुल्हन
’अटल रहे तेरा अहिवात..’ बोल भाते हैं !
अँधेरी रात में जब दीप झिलमिलाते हैं !!
******************
-सौरभ
(मौलिक और अप्रकाशित)

Views: 917

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rahul Dangi Panchal on November 4, 2014 at 11:46am
आदरणीय से एक सवाल है कि क्या गीत विधा भी मान्य बेहर पर लिखनी अनिवार्य है या अपनी बनायी हुई बहर पर भी लिख सकते है! क्या गीत में तुकान्त नियम भी गजल की तरह ही लागु होते है! क्रपया समझाने का कष्ट करें!

और हो सके तो गीत को समझने के लिए किसी उपयुक्त साधन भी बताने का कष्ट करें! प्लीज!
Comment by Rahul Dangi Panchal on November 4, 2014 at 11:39am
आदरणीय बहुत सुन्दर गीत है

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 31, 2014 at 9:16pm

आदरणीय नीलेशजी, आप ग़ज़ल के अलावा अन्य विधाओं की रचना पर कम ही आते हैं. आपके आशीर्वाद से रचना कंतिमान हुई है. हार्दिक धन्यवाद.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 31, 2014 at 9:16pm

आदरणीय सत्यनारायणजी, आपके अनुमोदन से प्रस्तुति का मान बढ़ा है. हार्दिक धन्यवाद


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 31, 2014 at 9:16pm

आदरणीय लक्ष्मण प्रसादजी, आपको रचना पसंद आयी, यह मुझे भी भला लगा.
हार्दिक धन्यवाद


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 31, 2014 at 9:15pm

आदरणीय गोपाल नारायनजी, इस हुलास से प्रस्तुति को अनुमोदित करने के लिए हार्दिक धन्यवाद. आपके अतिरेक से मुझे तनिक संकोच हो रहा है, आदरणीय. :-))


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 31, 2014 at 9:15pm

आदरणीय डॉ. विजय शंकरजी, प्रस्तुत गीत को आपने अनुमोदित किया. हार्दिक धन्यवाद.
सादर

Comment by Nilesh Shevgaonkar on October 22, 2014 at 2:19pm

बहुत सुंदर गीत 
शब्द शब्द गीत गा रहा है ,,गुनगुना रहा है ..
बधाई आपको 

Comment by Satyanarayan Singh on October 22, 2014 at 1:24pm

परम आ. सौरभ जी सादर

तावली कोई अल्हड़ झिंझोर दे मणियाँ 
कभी लगे कि झरे पारिजात अदबद कर 
रसालकुंज अघाया हुआ.. मताया-सा.. 
कुमारियों की नरम देह झुक गयी लद कर 

शकुंतला है इन्हीं वृक्ष, वन-लताओं में  
पुलक-पुकार से दुष्यंत फिर बुलाते हैं !
अँधेरी रात में जब दीप झिलमिलाते हैं !!
खूबसूरत एहसास की  सुन्दर अभिव्यक्ति हुई है  इस गीत के माध्यम से अतएव  हार्दिक बधाई .स्वीकार करें आदरणीय

दीपावली की अनेकानेक शुभकामनाएँ

सादर

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on October 22, 2014 at 12:04pm

किसी उदास की पीड़ा सजल हृदय में ले 
निशा निराश हुई, चुप वृथा पड़ी-सी थी 
तथा निग़ाह कहीं दूर व्योम में उलझी 
किसी करीब के होने की आस जीती थी 

मगर रुकी है कहाँ ज़िन्दग़ी किसी पल भी 
इसी विचार को समवेत स्वर में गाते हैं--
अँधेरी रात में जब दीप झिलमिलाते हैं !! --- दीपों की झिल्ल्मिलाती लड़ियों की सी रौशनी बिखेरती सुंदर गीत रचना के

लिए हार्दिक बधाई आदरणीय | दीपोत्सव त्यौहार की मंगल कामनाएं  

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
" कोई  सुनता नहीं मेरी वो असर है साईं   अब तो दीदावर न कोई न वो दर है…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"कोख से मौत तलक रात अमर है साईंअपने हिस्से में भला कौन सहर है साईं।१।*धूप ही धूप मिली जब से सफर है…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"सादर अभिवादन।"
5 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"स्वागतम"
6 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  प्रस्तुत नवगीत को आपसे मिला उत्साहवर्द्धन हमें प्रयासरत रखेगा, आदरणीय अशोक…"
9 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post कौन क्या कहता नहीं अब कान देते // सौरभ
"  आदरणीय रवि भसीन ’शाहिद’ जी, प्रस्तुति पर आपका स्वागत है। इस गजल को आपका अनुमोदन…"
18 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण भाई, नमस्कार। इस प्रस्तुति पे हार्दिक बधाई स्वीकार करें। हर शेर में सार्थक विचार…"
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Saurabh Pandey's blog post कौन क्या कहता नहीं अब कान देते // सौरभ
"आदरणीय सौरभ पांडे जी, नमस्कार। बहुत सुंदर ग़ज़ल कही है आपने, इस पे शेर-दर-शेर हार्दिक बधाई स्वीकार…"
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण भाई, नमस्कार। काफ़ी देर के बाद मिल रहे हैं। इस सुंदर प्रस्तुति पे बधाई स्वीकार…"
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक कुमार जी, नमस्कार। इस सुंदर ग़ज़ल पे हार्दिक बधाई स्वीकार करें। /रास्तों …"
yesterday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

प्रवाह, बुद्धिमत्ता और भ्रम का खेल सिद्धांत (लेख)

मनुष्य और भाषा के बीच का संबंध केवल अभिव्यक्ति का नहीं है, अगर ध्यान से सोचें तो यह एक तरह का खेल…See More
Sunday
pratibha pande replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ जी इस छन्द प्रस्तुति की सराहना और उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार "
Sunday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service