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बच्चों को अपने पहले इंसान हम बना दें

सूनी पड़ीं हैं कब से, रिश्तों की महफ़िलें ये,
आओ हम तुम मिल के, ये महफ़िलें सजा दें।
छेड़ी जो तान तुमने, मायूसी के शहर में,
हम भी हंसी की छोटी सी डुगडुगी बजा दें॥
     
बंद हैं दरवाजे, बहरों की बस्तियों में,
तो हम भी बन के गूंगे, इन्हें कोई सदा दें।  
कुछ ग़म की है उधारी, कुछ क़र्ज़ बेबसी का,
दे बेक़सी के सिक्के, ये क़र्ज़ कर अदा दें॥
     
खाते लज़ीज़ व्यंजन, समझोगे क्या ग़रीबी,
होता नहीं निवाला, किसी भूखे को खिला दें।  
सर पर हमारे बैठे, हैं रौंदते हमे जो,
आओ इन ग़लीज़ों की, मिल के जड़ हिला दें॥

ईमान बेच कर क्या, सोओगे चैन से तुम,
दे कोई जो रिश्वत, चलो उसको कर मना दें ।
और भी हैं राहें, ख़िदमत की मेरे यारों,
बनना है गर लुटेरा, चलो नेता तुम्हें बना दें ॥  

उड़ जाएगी ये दौलत, ये रंग शोहरतों के,
सबकी बेहतरी में, चलो इसको कर फ़ना दें।  
ओहदे से न मिलेगी, इज़्ज़त किसी के दिल में,
बच्चों को अपने पहले इंसान हम बना दें॥

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 578

Comment

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Comment by संदेश नायक 'स्वर्ण' on October 16, 2014 at 8:57am

आ. खुर्शीद जी, आ. गीत जी,
उत्साहवर्धन एवं बधाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ।

Comment by संदेश नायक 'स्वर्ण' on October 16, 2014 at 8:54am

माननीया राजेश कुमारी जी,
आपके प्रोत्साहन एवं स्नेह के लिए सादर आभार ।

Comment by संदेश नायक 'स्वर्ण' on October 16, 2014 at 8:52am

माननीय बाग़ी जी,
रचना पर आपकी सराहना एवं शुभकामनाओं के लिए बहुत बहुत आभार ।


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 15, 2014 at 1:50pm

//ओहदे से न मिलेगी, इज़्ज़त किसी के दिल में, 
बच्चों को अपने पहले इंसान हम बना दें॥ //

क्या बात है आदरणीय सन्देश नायक स्वर्ण जी, बहुत ही प्यारी रचना हुयी है, बधाई और हृदय से शुभकामनाएँ। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 15, 2014 at 12:09pm

ओहदे से न मिलेगी, इज़्ज़त किसी के दिल में, 
बच्चों को अपने पहले इंसान हम बना दें॥ -----बहुत अच्छी बात कही है 

हार्दिक बधाई इस प्रस्तुति के लिए |

Comment by संदेश नायक 'स्वर्ण' on October 15, 2014 at 11:31am

बहुत बहुत आभार, 'खुर्शीद जी' एवं 'गीत जी' । 
Comment by khursheed khairadi on October 15, 2014 at 9:36am

छेड़ी जो तान तुमने, मायूसी के शहर में, 

हम भी हंसी की छोटी सी डुगडुगी बजा दें॥ 

आदरणीय सन्देश जी अच्छी रचना ,हार्दिक बधाई और सादर अभिनन्दन 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 14, 2014 at 11:38pm

अच्छी रचना. बधाई आदरणीय सन्देश जी

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