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मेरा ईमान है हिंदी (ग़ज़ल 'राज')

1222  1222

वतन की जान है हिंदी

उपार्जित मान है हिंदी

 

धरा जो गुनगुनाती है

मुक़द्दस गान है हिंदी

 

हिमालय फ़क्र करता है

अजल से शान है हिंदी

 

तेरे वर्के तगाफ़ुल पे

नया  फ़रमान है हिंदी

 

इबादत पे सदाक़त पे

सदा कुर्बान है हिंदी

 

मेरा मजहब मेरी दौलत

मेरा ईमान है हिंदी

हमारी पाक़ संस्कृति में

बसा सम्मान है हिंदी  

------------------

(मौलिक एवं अप्रकाशित )

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 16, 2014 at 11:10am

बहुत- बहुत शुक्रिया मिथिलेश जी हिंदी के सम्मान में लिखी ये ग़ज़ल आपको पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 15, 2014 at 11:57pm

आदरणीया राजेशकुमारी जी हिन्दी महिमा बताती अच्छी ग़ज़ल, बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 28, 2014 at 6:45pm

आ० अखिलेश जी,आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सफल हुआ ,तहे दिल से आभारी हूँ | 

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on September 28, 2014 at 1:37pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी,

हिंदी की महिमा सुंदर शब्दों में गाई।

स्वीकार करें, हृदय से  मेरी बधाई॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 28, 2014 at 10:34am

आ० संतलाल करुण जी,बहुत- बहुत शुक्रिया  मेरी ग़ज़ल को मान देने के लिए ,मेरा लिखना सफल हुआ |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 28, 2014 at 10:33am

आ० गुमनाम पिथोरा गढ़ी जी,तहे दिल से आभार आपका |  

Comment by Santlal Karun on September 27, 2014 at 8:24pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी,

हिन्दी के गौरव पर शानदार हिन्दी ग़ज़ल के लिए सहृदय साधुवाद एवं सद्भावनाएँ --

"इबादत पे सदाक़त पे

सदा कुर्बान है हिंदी

 

मेरा मजहब मेरी दौलत

मेरा ईमान है हिंदी"

Comment by gumnaam pithoragarhi on September 27, 2014 at 7:31pm

हिन्दी की शान में उम्दा ग़ज़ल हुई है बधाई,,,,,,,,,,,,,,,,


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 27, 2014 at 3:04pm

आ० विजय निकोर जी ,ग़ज़ल को आपका अनुमोदन मिला तहे दिल से आभार आपका| 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 27, 2014 at 3:03pm

आ० खुर्शीद जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई दिल से शुक्रिया आपका मेरा लिखना सार्थक हुआ |

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