For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल -ख़ताएँ कुछ रही होंगी, सज़ाए ज़िन्दगी लायक

१२२२/१२२२/१२२२/१२२२ 
.
इरादे मैं यकीनन आज भी छोटे नहीं रखता,
मगर आँखों में अब अपनी तेरे सपने नहीं रखता.  
.
बड़ी शिद्दत से अपने इश्क़-ओ-रंजिश मै निभाता हूँ 
ख़बर रखता तो हूँ सबकी मगर फ़ि
तने नहीं रखता.
.
दिखाएगा वही सबको जो होंगे सामने उसके,

छुपाकर आईना कोई कभी चेहरे नहीं रखता.    
.
लहू के दाग़ कितनें ही पड़े हों रूह पर उसकी,
मगर वो शख्स जूते भी कभी मैले नहीं रखता.
.

ख़ताएँ कुछ रही होंगी, सज़ाए ज़िन्दगी लायक, 
वगरना क्या ख़ुदा मुझको क़रीब अपने नहीं रखता.
.

(मौलिक व् अप्रकाशित)
निलेश "नूर"

Views: 431

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 23, 2015 at 2:32pm

शुक्रिया आ. सौरभ सर 
आप की नज़रों से गुज़री तो मुकम्मल हो गयी ..
बहुत बहुत धन्यवाद 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 23, 2015 at 2:07pm

एक मतला और चार शेर ..
बस ग़ज़ल पूरी.. मगर हम गुम !
क्या साहब !!

दिखाएगा वही सबको जो होंगे सामने उसके,
छुपाकर आईना कोई कभी चेहरे नहीं रखता.    

लहू के दाग़ कितनें ही पड़े हों रूह पर उसकी,
मगर वो शख्स जूते भी कभी मैले नहीं रखता.

ख़ताएँ कुछ रही होंगी, सज़ाए ज़िन्दगी लायक,
वगरना क्या ख़ुदा मुझको क़रीब अपने नहीं रखता.

’हाथ’ छू लेने दो फूलों (मेरा नाम ले लेना) को इनायत होगी.. इनायत होगी !!

Comment by Nilesh Shevgaonkar on August 20, 2014 at 10:42am

शुक्रिया डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी; आ. मीना पाठक जी; आ गिरिराज जी; आ. लक्ष्मण जी; आ. नरेन्द्र सिंह जी 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 19, 2014 at 10:53am

मगर आँखों में अब अपनी तेरे सपने नहीं रखता. 

आ० नीलेश भाई , हर पंक्ति के लिए दाद कबूल करें l


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 19, 2014 at 8:13am

वाह वा ! क्या खूबसूरत ग़ज़ल कही है , हर शे र उम्दा है , बधाइयाँ आदरणीय नीलेश भाई |

Comment by Meena Pathak on August 18, 2014 at 7:28pm

बहुत खूब ...बधाई 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 18, 2014 at 6:22pm

नूर जी 

बेहतरीन -----

बड़ी शिद्दत से अपने इश्क़-ओ-रंजिश मै निभाता हूँ 
ख़बर रखता तो हूँ सबकी मगर फ़ितने नहीं रखता.

ख़ताएँ कुछ रही होंगी, सज़ाए ज़िन्दगी लायक, 
वगरना क्या ख़ुदा मुझको क़रीब अपने नहीं रखता

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Nilesh Shevgaonkar replied to Saurabh Pandey's discussion पटल पर सदस्य-विशेष का भाषायी एवं पारस्परिक व्यवहार चिंतनीय
"ऐसे😁😁"
2 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Saurabh Pandey's discussion पटल पर सदस्य-विशेष का भाषायी एवं पारस्परिक व्यवहार चिंतनीय
"अरे, ये तो कमाल  हो गया.. "
3 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Saurabh Pandey's discussion पटल पर सदस्य-विशेष का भाषायी एवं पारस्परिक व्यवहार चिंतनीय
"आदरणीय नीलेश भाई, पहले तो ये बताइए, ओबीओ पर टिप्पणी करने में आपने इमोजी कैसे इंफ्यूज की ? हम कई बार…"
3 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Saurabh Pandey's discussion पटल पर सदस्य-विशेष का भाषायी एवं पारस्परिक व्यवहार चिंतनीय
"आपके फैन इंतज़ार में बूढे हो गए हुज़ूर  😜"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post एक धरती जो सदा से जल रही है [ गज़ल ]
"आदरणीय लक्ष्मण भाई बहुत  आभार आपका "
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on गिरिराज भंडारी's blog post एक धरती जो सदा से जल रही है [ गज़ल ]
"आ. भाई गिरिराज जी, सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है । आये सुझावों से इसमें और निखार आ गया है। हार्दिक…"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मौत खुशियों की कहाँ पर टल रही है-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई गिरिराज जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, उत्साहवर्धन और अच्छे सुझाव के लिए आभार। पाँचवें…"
7 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post एक धरती जो सदा से जल रही है [ गज़ल ]
"आदरणीय सौरभ भाई  उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार , जी आदरणीय सुझावा मुझे स्वीकार है , कुछ…"
8 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - वो कहे कर के इशारा, सब ग़लत ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय सौरभ भाई , ग़ज़ल पर आपकी उपस्थति और उत्साहवर्धक  प्रतिक्रया  के लिए आपका हार्दिक…"
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - वो कहे कर के इशारा, सब ग़लत ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय गिरिराज भाईजी, आपकी प्रस्तुति का रदीफ जिस उच्च मस्तिष्क की सोच की परिणति है. यह वेदान्त की…"
9 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . . उमर
"आदरणीय गिरिराज भाईजी, यह तो स्पष्ट है, आप दोहों को लेकर सहज हो चले हैं. अलबत्ता, आपको अब दोहों की…"
9 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Saurabh Pandey's discussion पटल पर सदस्य-विशेष का भाषायी एवं पारस्परिक व्यवहार चिंतनीय
"आदरणीय योगराज सर, ओबीओ परिवार हमेशा से सीखने सिखाने की परम्परा को लेकर चला है। मर्यादित आचरण इस…"
9 hours ago

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service