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ग़ज़ल (ख़्वाबों पे उसका पहरा है)

ख़्वाबों पे उसका पहरा है!

यादों का सागर गहरा है !!

चीखें वो फिर सुनाता कैसे!

मुझको तो लगता बहरा है !!

आईने में भी देखा कर !

क्या ये तेरा ही चेहरा है !!

बातें उसनें कर दी ऐसी !

दिल में सन्नाटा ठहरा है !!

कतरा -कतरा जीता हूँ मैं!

मेरे अन्दर भी सहरा है !!

*************************

राम शिरोमणि पाठक"दीपक"

मौलिक/अप्रकाशित 

Views: 425

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Comment by ram shiromani pathak on August 17, 2014 at 6:24pm

हार्दिक आभर आदरणीय Dr Ashutosh Mishra जी .........   सादर

Comment by ram shiromani pathak on August 17, 2014 at 6:23pm

हार्दिक आभर आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी .........   सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 17, 2014 at 4:41pm

भाई रामशिरोमणीजी,  ग़ज़ल व्यवस्थित हुई है.

बधाई

Comment by Dr Ashutosh Mishra on August 17, 2014 at 2:47pm

इस सुंदर प्रयास पर हार्दिक बधाई सादर 

Comment by ram shiromani pathak on August 13, 2014 at 5:42pm

हार्दिक आभर भाई नरेंद्र  जी

Comment by ram shiromani pathak on August 13, 2014 at 5:42pm

हार्दिक आभर भाई पवन जी

Comment by Pawan Kumar on August 13, 2014 at 4:24pm

ख़्वाबों पे उसका पहरा है! सुन्दर भाव!

कृपया ध्यान दे...

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