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ग़ज़ल - गिरिराज भंडारी - - कभी झेली भी है शर्मिन्दगी क्या

कभी  झेली  भी है शर्मिन्दगी क्या

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 1222      1222       122

कभी खुद से शिकायत भी हुई क्या

कभी  झेली  भी है शर्मिन्दगी क्या

 

बहुत  बाहोश खोजे , मिल न पाये

मिला  देगी  हमें अब  बेखुदी क्या

 

ये क़िस्सा,  दर्द- आँसू  से बना है

समझ  लेगी  इसे आवारगी  क्या

 

अगर सीने में सादा दिल है ज़िन्दा

बनावट  बाहरी क्या, सादगी  क्या

 

ख़ुदा वालों  ख़ुदा  कहने से  पहले

ज़रा सा जान तो लो, है खुदी क्या

 

हमें तो  पेट ने  कर डाला  बेसुघ

हमारी  क़ाफिरी  क्या, बंदगी क्या

 

अमीरी , ज़िंदगी  जीती  हो शायद

हमारी  मौत क्या है ज़िंदगी  क्या

 *******************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित 

 

 

 

 

Views: 790

Comment

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Comment by Amod Kumar Srivastava on August 5, 2014 at 10:11pm

सभी पंक्तियाँ बहुत सुंदर ... विशेष रूप से मुझे 

ये क़िस्सा,  दर्द- आँसू  से बना है

समझ  लेगी  इसे आवारगी  क्या

बहुत ही उम्दा, बधाई स्वीकार करें ...सादर ॥ 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 5, 2014 at 8:29pm

kya baat hai ? gajal ke sartaj I

हमें तो  पेट ने  कर डाला  बेसुघ

हमारी  क़ाफिरी  क्या, बंदगी क्या

 

अमीरी , ज़िंदगी  जीती  हो शायद

हमारी  मौत क्या है ज़िंदगी  क्या


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 5, 2014 at 7:08pm

एक बेहतरीन मतले से शुरु हुआ सफ़र आखिरी शेर तक आते-आते कई रंग दिखा जाता है.
इस कामयाब ग़ज़ल के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद, भाईजी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 5, 2014 at 5:53pm

आदरणीय भुवन भाई , गज़ल की सराहना के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया ॥

Comment by भुवन निस्तेज on August 5, 2014 at 5:32pm

अगर सीने में सादा दिल है ज़िन्दा

बनावट  बाहरी क्या, सादगी  क्या

 

ख़ुदा वालों  ख़ुदा  कहने से  पहले

ज़रा सा जान तो लो, है खुदी क्या

 

हमें तो  पेट ने  कर डाला  बेसुघ

हमारी  क़ाफिरी  क्या, बंदगी क्या

ये अशआर बेहद पसंद आए आदरणीय, बधाई हो ...


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 5, 2014 at 5:21pm

आदरणीय नीरज मिश्रा भाई , आपकी स्नेहिल सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ॥

Comment by Neeraj Nishchal on August 5, 2014 at 4:06pm


आप जब दिल के भावों को ग़ज़ल में ढाल लिखते हैं ।
आदरणीय गिरिराज भंडारी जी बखुदा कमाल लिखते हैं ।

बहुत ही खूबसूरत बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल बधाई ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 5, 2014 at 11:55am

आदरणीय लक्ष्मण भाई , आपका बहुत बहुत आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 5, 2014 at 11:55am

आदरणीय नरेन्द्र सिंह भाई , हौसला अफज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रिया ॥ 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 5, 2014 at 11:53am

आ. अजय भाई , सराहना के लिये आपका आभारी हूँ ।

कृपया ध्यान दे...

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