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अहंकार ना

कभी आ जाये हमें

दिन न आये |

 

मनमोहन

छेड़े बंसी की तान

झूमती आऊं |

 

तनहा तुम

देगा न कोई साथ

खयाल रहे |

प्रकृति हमें

देती सब संपदा

लगाएं वृक्ष |

 

समेट रही

आँचल में अपने

पुष्प बिखरे |

         

अजनबी हम

चलते रहे साथ

इक दूजे के |

 

माता का हाथ

रहे सदैव माथ 

धन्य जीवन |

 

पारिजात है

जमीं पर बिखरे

समेटूँ सारे |

 
मीना पाठक 
मौलिक/अप्रकाशित 

 

Views: 669

Comment

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Comment by Meena Pathak on July 1, 2014 at 4:29pm

आदरणीय बृजेश जी ..आदरणीय बागी जी गलती स्वीकार करती हूँ ..आगे से ख्याल रखूँगी | सादर 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 1, 2014 at 9:43am

सुंदर प्रस्तुति पर बधाई आपको आदरणीया मीना दीदी


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 30, 2014 at 8:56pm

आदरणीया मीना जी, इस प्रस्तुति पर मैं बधाई प्रेषित कर रहा हूँ, यदि बृजेश भाई न लिखे होते तो मैं लिखता, सहमत हूँ आपसे बृजेश जी। 

Comment by बृजेश नीरज on June 30, 2014 at 8:28pm
अच्छा प्रयास है। आपको बधाई।
हाइकु लिखते समय यह ध्यान रखना आवश्यक है कि प्रत्येक पंक्ति अपने अर्थ के लिए पूर्ण और स्वतंत्र होती है। आपके कुछ हाइकु की पंक्तियाँ अपने अर्थ के लिए दूसरी पंक्ति पर निर्भर हैं।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 30, 2014 at 7:03pm

अद्भुत मीना जी /बहुत चुने शब्द /बहुत सुन्दर भाव / आपसे एक सशोधन चाहूँगा--

                                                                                                           अजनबी थे

                                                                                                           चलते रहे साथ

                                                                                                           इक दूजे के |

Comment by Pankaj Trivedi on June 30, 2014 at 6:54pm
सम्माननीय मीना जी, ओबीओ पर 'इस माह के सक्रीय सदस्य' के रूप में आपका सम्मान हो रहा है, मेरी दिल से शुभ कामनाएँ है कि आप सदा अग्रेसर रहें और अपनी सृजनात्मकता का उजास दुनिया में फैलें | बधाई - पंकज त्रिवेदी
Comment by Dr. Vijai Shanker on June 30, 2014 at 6:53pm
बहुत सुन्दर रचना है आदरणीय सुश्री मीना पाठक जी , बधाई . प्रथम पंक्तियों में तो एक जीवन दर्शन है -

अहंकार ना
कभी आ जाये हमें
दिन न आये |
बहुत बहुत बधाई।
बस इतना ही -
एक हम हैं ,
ये अहंकार आ न जाए .
एक वो हैं ,
ये अहंकार चला न जाए .

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