For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

212 212 212 212
गीत गा कर उसे हम सुनाते रहे
हाल दिल का उसे हम बताते रहे

रात भी तो गुजरने लगी थी मगर
पास आये न बाते बनाते रहे

प्‍यार उन से करे हम कहाँ बैठ जब
चाँद से भ्‍ाी उसे हम छुपाते रहे

प्‍यार हमने किया प्‍यार उसने किया
वो मिटाते रहे हम निभाते रहे

माँग उसकी सजाई लहू से मगर
साथ चल ना सके हम बुलाते रहे

फिर मिलेगे कभी ना कभी हम यहाँ
आस के दीप मन में जलाते रहे

मौलिक व अप्रकाशित अखंड गहमरी

Views: 472

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Akhand Gahmari on April 17, 2014 at 8:25pm

उत्‍साहवर्धन के लिये हम आपके आभारी है आदरणीया Meena Pathak जी

Comment by Akhand Gahmari on April 17, 2014 at 8:25pm

उत्‍साहवर्धन के लिये हम आपके आभारी है आदरणीय Sachin Dev जी

Comment by Akhand Gahmari on April 17, 2014 at 8:24pm

उत्‍साहवर्धन के लिये हम आपके आभारी है आदरणीय शकील जमशेदपुरी जी

Comment by Akhand Gahmari on April 17, 2014 at 8:24pm

उत्‍साहवर्धन के लिये हम आपके आभारी है आदरणीय गिरिराज भंडारी जी

Comment by Akhand Gahmari on April 17, 2014 at 8:24pm

उत्‍साहवर्धन के लिये हम आपके आभारी है आदरणीय Dr Ashutosh Mishra जी

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 16, 2014 at 12:21pm

यार उन से करे हम कहाँ बैठ जब
चाँद से भ्‍ाी उसे हम छुपाते रहे

फिर मिलेगे कभी ना कभी हम यहाँ
आस के दीप मन में जलाते रहेआदरणीय अखंड भाई   ..आपकी उम्मीद कायम रहे ..इंसान को आशावादी होना चाहिए....दोनों शेर मुझे बेहद पसंद आये ..मेरी तरफ से हार्दिक बधाई .सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 15, 2014 at 6:18pm

आदरनीय अखंड भाई , बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है , मेरी हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें !!

Comment by शकील समर on April 15, 2014 at 4:16pm

धुन में पढ़ गया...मजा आ गया।

Comment by Sachin Dev on April 15, 2014 at 2:57pm

आदरणीय अखंड गहमरी जी, इस सुंदर गजल पर हार्दिक बधाई आपको ! 

Comment by Meena Pathak on April 15, 2014 at 2:35pm

अति सुन्दर .. बहुत बहुत बधाई 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्ताहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। क्रोध पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। साथ ही भाई अशोक जी की बात…"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
8 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"   हमारे बिना यह सियासत कहाँजवाबों में हम हैं सवालों में हम।३।... विडम्बना…"
8 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"   सूर्य के दस्तक लगानादेखना सोया हुआ है व्यक्त होने की जगह क्यों शब्द लुंठितजिस समय…"
8 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"      तरू तरु के पात-पात पर उमढ़-उमढ़ रहा उल्लास मेरा मन क्यूँ उन्मन क्यूँ इतना…"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, क्रोध विषय चुनकर आपके सुन्दर दोहावली रची है. हार्दिक बधाई स्वीकारें.…"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, प्रस्तुत ग़ज़ल पर उत्साहवर्धन के लिए आपका दिल से शुक्रिया.…"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"   आदरणीय भाई लक्षमण धामी जी सादर, प्रस्तुत ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
9 hours ago
Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह बहुत सुंदर प्रस्तुति हुई है आदरणीय लक्ष्मण धामी जी । हार्दिक बधाई "
10 hours ago
Sushil Sarna commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"वाहहहहहह आदरणीय क्या ग़ज़ल हुई है हर शे'र पर वाह निकलती है । दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं…"
10 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service