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कुत्ते का बच्चा

कुत्ते का बच्चा 

गया मर,
एड़ियाँ रगड़,
किसे फिकर,
काली चमकती सड़क,,
चलती गाड़ियाँ बेधड़क,
बैठा हाकिम अकड़,
कलफ़ कड़क,
सड़क पर किसका हक़?
क्यों रहा भड़क?
किसके लिए बनी
काली चमकती सड़क?
कुत्ता कितना कुत्ता है
चला आता है,
धुल भरी पगडंडियां
गाँव की
छोड़कर.

.. नीरज कुमार नीर
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Neeraj Neer on March 25, 2014 at 7:48pm

आपका हार्दिक आभार आदरणीया राजेश कुमारी जी ..

Comment by Dr Ashutosh Mishra on March 25, 2014 at 5:49pm

सुंदर रचना के हार्दिक बढ़ाई  सादर 

Comment by Abhinav Arun on March 25, 2014 at 2:35pm

एक सशक्त रचना के ह्रदय से साधुवाद !!

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 25, 2014 at 2:08pm

लोगो में जागरूकता की कमी पर रची सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई श्री नीरज कुमार जी 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 24, 2014 at 9:54pm

चमचमाती गाड़ियों में, मेम साहब की गोंद में, कुत्ते और उनके बच्चे, एक पहलू यह भी है, वैसे गाड़ी चलाने वाले जानबूझकर एक चिट्टी भी नहीं दबाते, खैर कविता अच्छी हुई है, बधाई।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 24, 2014 at 9:01pm

मर्म स्पर्शी प्रस्तुति ...किसे फ़िक्र है कि गाडी के नीचे कुत्ते का बच्चा आ गया ...वो तो कुत्ते का बच्चा है ..इंसान के बच्चे की भी फ़िक्र कहाँ किसे है? आपकी रचनाओं में आज के हालात की सच्ची तस्वीर दिखाई देती है ,बहुत खूब ..बधाई आपको एवं शुभकामनायें नीरज कुमार जी.  

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