For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मगर अहसास पैदा हो - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

1222    1222    1222    1222


समझ   लूँ  मैं गुनाहों को भला अतवार1 से कैसे
मगर पूछूँ  तरीका  भी   किसी  अबरार2 से कैसे

**
सभी की थी दुआएं तो जला जब भी यहाँ  दीपक
मिटाया पर गया ना तब  बता अनवार3 से कैसे

**
हमेशा  बोलता  था  तू  नहीं  रिश्ता  रहा   कोई
गले लगती बता कमसिन किसी अगियार4 से कैसे

**
जुटा पाया न मैं साहस अना5 की बात कहने को
उलझ वो  भी  गई  पूछे किसी अफगार6 से कैसे

**
सदा लेते जनम वो तो गलत को ठीक करने हित
हुई  भूलें  यहाँ   पर तब  बता  अवतार  से  कैसे

**
सहज तो है ‘मुसाफिर' यूँ  बयाँ करना दिलो का दुख
मगर  अहसास  पैदा  हो  महज  अजकार7 से  कैसे

**
1.    रंगढंग/आचार विचार    2.  परहेजी/संयमी
3.    रौशनी     4. बेगाना     5. कष्ट  
6.    बुरी तरह जख्मी         7. वर्णन  

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 437

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 23, 2014 at 10:33pm

भाई लक्ष्मणजी, किसी तथ्य की ग्राह्यता प्रश्न में परिणत अवश्य हो सकती है किन्तु उसका अन्यान्य पूरकों के सापेक्ष होना भ्रमित कर सकता है.
यथा, भौतिक वस्तु के शीत या ताप का क्रम, लम्बाई या ऊँचाई आदि की माप इत्यादि. श्रीमान, इसी क्रम में शाब्दिक क्लिष्टता को लें. एक के लिए दुरूह अथवा क्लिष्ट शब्द किसी दूसरे के लिए सहज अथवा सामान्य शब्द हो सकते हैं. यदि अप्रचलित शब्दों का प्रयोग हुआ तो ऐसी कोई तथ्यात्मकता अवश्य ही विशिष्ट श्रेणी की हो जाती है. ऐसे में बहुसंख्यक पाठकों की दशा विमूढ़ की हो सकती है. मेरी उक्ति की स्पष्टता संतुष्ट कर रही होगी ऐसा पूर्ण विश्वास है.
शुभ-शुभ

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 23, 2014 at 8:46pm

आदरणीय सौरभ भाई जी , हार्दिक धन्यवाद , साथ ही आपसे मसविरा चाहता हूँ कि जैसा कि सरिता जी ने कहा है कि मैंने अधिक कठिन शब्दों का चयन किया है ,यह बात सही है पर क्या इस तरह के शब्दों का चयन करना अच्छा नहीं है ,संसय में हूँ मार्गदर्शन करें ,


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 22, 2014 at 11:56pm

ठीक है.

क़ाफ़िया के अनुसार ही ग़ज़ल हुई है.

शुभ-शुभ

Comment by Ajay Agyat on March 2, 2014 at 2:03pm

umda


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 1, 2014 at 6:33pm

आदरणीय लक्ष्मण भाई , बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है , आपको दिली बधाइयाँ ॥

सहज तो है ‘मुसाफिर' यूँ  बयाँ करना दिलो का दुख
मगर  अहसास  पैदा  हो  महज  अजकार से  कैसे --------- मक़्ता बहुत पसन्द आया भाई , बधाइयाँ ॥

Comment by annapurna bajpai on March 1, 2014 at 1:26pm

खूबसूरत गजल , बधाई ।

Comment by Sarita Bhatia on February 26, 2014 at 9:58am

बहुत मुश्किल शब्दों का चयन किया है आपने 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
11 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
17 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
17 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
19 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
Tuesday
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service