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ग़ज़ल - दिले-ग़ालिब कहाँ से लाओगे

आज मजलूम को सताओगे

बददुआ सात जन्म पाओगे

 

बह्र ग़ालिब की खूब लिख डालो

दिले-ग़ालिब कहाँ से लाओगे

 

खुद को भगवान मान  बैठेगा

हद से ज्यादा जो सिर झुकाओगे

 

आज साहब बने हो रैली में

कल तुम्हीं झुनझुना बजाओगे

 

खूब खोजी बने थे हाकिम के

अब हुनर जेल में दिखाओगे

 

अमित दुबे मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 20, 2014 at 5:37pm

आदरणीय अमित भाई , बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है , आपको बधाइयाँ ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on February 20, 2014 at 10:11am

अच्छी ग़ज़ल है आदरणीय अमित दुबे जी बहुत बहुत बधाई
कहीं टंकण त्रुटि है ठीक कर लीजियेगा

Comment by shashi purwar on February 20, 2014 at 9:02am

वाह बहुत सुन्दर गजल

बह्र ग़ालिब की खूब लिख डालो

दिले-ग़ालिब कहाँ से लाओगे

 

वाह वाह ,आदरणीय अमित जी हार्दिक बधाई ,

Comment by नादिर ख़ान on February 20, 2014 at 12:05am

आज मजलूम को सताओगे

बददुआ सात जन्म पाओगे

 

बह्र ग़ालिब की खूब लिख डालो

दिले-ग़ालिब कहाँ से लाओगे

बहुत खूब कहा आदरणीय अमित जी... लाजवाब...

खुद को भगवन मान बैठेगा .. शायद प्रिंटिंग मिस्टेक है, भगवान होना चाहिए था।

जहाँ तक हम  समझ प रहे है, वजन 212  212  1222  है ।अगर हम  गलत हैं  तो कृपया मार्गदर्शन करें ।

Comment by Sarita Bhatia on February 19, 2014 at 5:44pm

वाह खुबसूरत 

कृपया ध्यान दे...

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