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ज्यों प्रसून जल-जन्य ( दोहावली) //डॉ० प्राची

नत-मस्तक वंदन करूँ, हे प्रभु! प्राणाधार

तमस क्षरण कर ज्ञान का, प्रभु कीजै विस्तार

कर्म रती या रिक्त मन, हो सुमिरन अविराम 

क्षणिक न विस्मृत उर करे, प्रभु तव शुचिकर नाम 

नयन मूँद - अन्तः रमे, दर्शन - तव विस्तार 

झंकृत वीणा तार पर, श्रव्य मधुर मल्हार 

क्षणभंगुर जग बंध से, मुक्त रहे चैतन्य 

नित्य पंक अस्पृष्ट है, ज्यों प्रसून जल-जन्य

प्राप्य प्रयोजन पूर्ण कर, हो विदीर्ण स्वयमेव 

विरह मिलन भव मुक्त उर, यदि विनष्ट अहमेव 

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Comment by Neeraj Neer on February 1, 2014 at 2:10pm

बहुत ही सुन्दर प्रार्थना ... 

नयन मूँद - अन्तः रमे, दर्शन - तव विस्तार 

झंकृत वीणा तार पर, श्रव्य मधुर मल्हार ... इन पंक्तियों में तो पूरा अध्यात्म ही लिख दिया , बहुत खूब आदरणीया , बधाई आपको .

Comment by mohinichordia on February 1, 2014 at 11:53am

 क्षण भंगुर जग बंध से  मुक्त रहे चैतन्य  .... पूरी रचना सुन्दर .सत्यं. शिवं ..सुन्दरम. प्राची सिंह जी  दोहे गागर में सागर . 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 1, 2014 at 10:32am

भावपूर्ण सुन्दर, सात्विक और सार्थक दोहे रचे है | निम्न दोहे बेहद पसंद आये - -

नत-मस्तक वंदन करूँ, हे प्रभु! प्राणाधार

तमस क्षरण कर ज्ञान का, प्रभु कीजै विस्तार | 

नयन मूँद - अन्तः रमे, दर्शन - तव विस्तार 

झंकृत वीणा तार पर, श्रव्य मधुर मल्हार |

हार्दिक बधाई डॉ प्राची सिंह जी | सादर 

Comment by Vindu Babu on February 1, 2014 at 8:42am

आदरणीया प्राची दी:

हर दोहे को कई-कई बार पढ़ा,भाव हृदय तक उतर गये।

एक  प्रणम्य प्रार्थना...अद्भुत समर्पण...परम् के लिए।

दोहावली बहुत भाई।

आपको ढेरों शुभकामनायें।

सादर

 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 31, 2014 at 11:11pm

बेहतरीन दोहावली किसी एक की क्या बात करूँ सारे पसंद आये बहुत बहुत बधाई आपको  

Comment by coontee mukerji on January 31, 2014 at 7:58pm

प्राची जी, आपकी  रचनाएँ मोती की तरह है. इसे मैं सहेजकर रखती हूँ पुनः पढ़ने के लिये.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 31, 2014 at 7:49pm

प्रिय प्राची ,वैसे तो सभी दोहे सराहनीय हैं ये सबसे अधिक पसंद आया ---

नयन मूँद - अन्तः रमे, दर्शन - तव विस्तार 

झंकृत वीणा तार पर, श्रव्य मधुर मल्हार ----अतिसुन्दर 

बहुत- बहुत बधाई इन  सुन्दर सात्विक दोहों के लिए 

Comment by Sarita Bhatia on January 31, 2014 at 5:06pm

खुबसूरत दोहावली प्राची जी 

कृपया ध्यान दे...

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