For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

श्रीराम कुछ क्रोधित होकर बोले, “हनुमान तुमसे सीता की ख़बर लाने को कहा था। तुमने लंका में आग क्यों लगा दी?”

हनुमान शांत भाव से बोले, “प्रभो! जब तक हम जैसे आदिवासी पहाड़ों की गुफाओं, जंगलों और खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं तब तक दुनिया में किसी को भी सोने के महल में रहने का अधिकार नहीं है। मुझे धरती पर हमेशा रहना है अतः मैं कभी मार्क्स, कभी मिन्ह, कभी लेनिन तो कभी माओ बनकर जनमानस तक ये संदेश पहुँचाता रहूँगा। सोने की लंका जलाकर मैंने इसकी शुरुआत की है प्रभो।“

हनुमान के इतना कहते ही श्रीराम ने उठकर उन्हें अपनी सीने से लगा लिया और सारी वानर सेना एक साथ बोल उठी, “कामरेड हनुमान की जय”। 

--------------

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 858

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on January 31, 2014 at 8:51pm

आदरणीय  सौरभ जी लाल रंग का जिक्र करके तो आपने गजब ही कर दिया। इसके बारे में तो मैंने सोचा ही नहीं था। बहुत बहुत धन्यवाद लघुकथा पसंद करने के लिए।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 14, 2014 at 10:59pm

एक ऐसी घटना जो पीढ़ियों से कही-सुनी जा रही है उसे आज के संदर्भ दे कर पुनः उद्धृत करने की परंपरा कोई नयी नहीं है. यही गोसाईं जी ने भी किया था जब रामायण से प्रभावित होकर उसके एक हिस्से को अवधी में अपने मंतव्यों के साथ पद्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया. और, उनके साथ यही कार्य इस भूमि के करीब सभी भाषाओं के कई रचनाकारों ने किया, गद्य में, तो पद्य में रूप भी. कइयों ने पूरी घटना को नया अर्थ और कलेवर दिया तो कुछ पूरी उक्त कथा से कोई एक या दो अंश ले कर उसको आधुनिक, सामाजिक या वैचारिक रूप दे गये.
 
आपकी लघुकथा ऐसी ही एक सफल कोशिश है. इसके लिए हार्दिक बधाई आदरणीय.


और ’कामरेड हनुमान’ ..  ;-)))
भाई यह तो ज्यादती है बेचारों पर ! एक तो ऐसे ही वे हाशिये पर धकेले जाने के कारण अर्थ का अनर्थ करने पर उतारू हैं. उस पर से आपने लाल्-लाल जले पर शुद्ध देहाती नमक छिड़क दिया.
शुभ-शुभ

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on January 9, 2014 at 9:57pm

धर्मेन्द्र भाई , लघु कथा की बधाई। समतावादी हनुमान की जय।

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on January 9, 2014 at 8:53pm

बहुत बढ़िया लघुकथा आदरणीय धर्मेन्द्र जी, बधाई स्वीकारें

Comment by Meena Pathak on January 9, 2014 at 12:33pm

सुन्दर लघुकथा .. 

Comment by Shyam Narain Verma on January 9, 2014 at 11:46am
बहुत बढ़िया लघुकथा आदरणीय, हार्दिक बधाई स्वीकारें....................
Comment by savitamishra on January 9, 2014 at 10:41am

बहुत बढ़िया लघुकथा

Comment by vandana on January 9, 2014 at 5:45am

वाह आदरणीय धर्मेन्द्र सर बहुत बढ़िया लघुकथा 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 8, 2014 at 10:13pm

आदरणीय धर्मेन्द्र भाई , पुरानी बात को आपने बहुत नये ढ़ंग से लघुकथा मे कही है ॥ वाह भाई , आपको हार्दिक बधाई ॥

Comment by Saarthi Baidyanath on January 8, 2014 at 10:06pm

क्या कहानी रची  है ...लाखों वर्ष पुरानी कथा ..एकदम नये कलेवर में ! बहुत सार्थक ...उत्तम रचना 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Monday
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service