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धूप उतर आयी
झरोखे से झांक
आज़ सुबह मेरे कमरे मे
जब धूप उतर आयी
बढ़ गई थोड़ी सी
चंचल तरुणाई ।
यह धूप आज़ महंगी है, पर –
कल तक आवारा थी
शांति मुझे देती अब
गंगा की धारा सी ।
कैसे बताऊँ क्या है ?
जल्द फिसल जाती है
तन ठिठुर जाता
हर छाँव सिहर जाती है ।
अब तक अनदेखी है
तेरी गोराई !
ऐसे मे अनजानी
याद तेरी आयी ।
आज़ मेरे कमरे मे –
धीरे से
धूप उतर आयी
बढ़ गयी थोड़ी सी
चंचल तरुणाई ।
- मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment

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Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on January 1, 2014 at 5:55pm
सुन्दर रचना आदरणीय ब्रह्मचारी जी!
Comment by S. C. Brahmachari on December 20, 2013 at 5:25pm
! आदरणीय कुंती भाभी, श्याम नारायण वर्मा जी,सविता जी, डॉ गोपाल नारायण वर्मा जी,प्रियंका जी,वंदना जी,जितेंद्र गीत जी, मीना पाठक जी , गिरिराज भण्डारी जी , बहन कल्पना रामानी जी , भाई सौरभ पांडे जी, डॉ प्राची सिंह जी : " धूप उतर आयी " रचना पर आपकी भावाभिव्यक्ति के लिए मै हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ ~~~~~ एस सी ब्रह्मचारी
Comment by annapurna bajpai on December 20, 2013 at 5:03pm

सुंदर , अद्वितीय रचना बधाई आपको आ0 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 20, 2013 at 12:56pm

सुन्दर भावभीनी प्रस्तुति 

हार्दिक बधाई आदरणीय 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 20, 2013 at 3:51am

मस्तिष्क के कोमल तंतुओं के झंकृत हो जाने की सुन्दर दशा बन आयी.. बधाई, आदरणीय, बधाई.. !

:-)))))

सादर

Comment by कल्पना रामानी on December 19, 2013 at 9:26pm

झरोखे से झांक
आज़ सुबह मेरे कमरे मे
जब धूप उतर आयी
बढ़ गई थोड़ी सी
चंचल तरुणाई ।...

बहुत सुंदर कल्पना है ... बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय ब्रह्मचारी जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 19, 2013 at 6:52pm

आदरणीय , सुन्दर रचना के लिये आपको बहुत बधाई !!

Comment by Meena Pathak on December 19, 2013 at 2:15pm

बहुत सुन्दर, कोमल रचना | सादर बधाई 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on December 19, 2013 at 8:46am

ऐसे मे अनजानी
याद तेरी आयी ।
आज़ मेरे कमरे मे –
धीरे से
धूप उतर आयी
बढ़ गयी थोड़ी सी
चंचल तरुणाई ।

बेहद सुंदर भाव, सच! कल्पना की कोई सीमा नहीं, बधाई स्वीकारें आदरणीय एस.सी.ब्रह्मचारी जी

Comment by vandana on December 19, 2013 at 6:48am

सर्दी की धूप जैसी कोमल रचना ....बहुत सुन्दर आदरणीय 

कृपया ध्यान दे...

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