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दो पल की है ज़िन्दगी,हँस के जी लो यार !

कटुता को अब भूलकर ,बाटो थोड़ा प्यार!!

देने से मिलता सदा,खुद को भी सम्मान !
इस निवेश की गूढ़गति ,ध्यान रखें श्रीमान !!

रोम रोम पुलकित हुआ ,कितना कोमल वार !
अधरों पर मुसकान है ,तिरछे नैन कटार!!

मधुर कंठ की स्वामिनी,कोमल मृदु बर्ताव !
कष्टों पर औषधि सदृश ,भर जाती है घाव !!

घर घर में दिखते मुझे,दुस्शासन लंकेश !
फिर कैसे बँधते भला,द्रुपद सुता के केश!!

गिरते पत्ते कह रहे,छोटी सी यह बात!
सब मिट्टी का है बना,उसमें मिलना तात!!
*********************************************
राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by annapurna bajpai on December 12, 2013 at 9:17pm

सुंदर दोहावली बहुत बधाई , आ० राम शिरोमणि जी । 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on December 12, 2013 at 11:39am

दो पल की है ज़िन्दगी,हँस के जी लो यार !

कटुता को अब भूलकर ,बाटो थोड़ा प्यार!!..............सच!  प्यार से जियो तो पल में निकल जाता है जीवन, नफरत में इक दिन भी वर्षों की तरह लगता है

देने से मिलता सदा,खुद को भी सम्मान !
इस निवेश की गूढ़गति ,ध्यान रखें श्रीमान !!...........यह बिलकुल सच है, जो बोओगे, वही काटना है

बहुत सुंदर दोहावली रचना, जीवन में सार्थक सन्देश देते हुए, बधाई स्वीकारें आदरणीय राम भाई

Comment by ram shiromani pathak on December 11, 2013 at 7:04pm

बहुत बहुत आभार आदरणीया किरण जी। ........ सादर 

Comment by ram shiromani pathak on December 11, 2013 at 7:03pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय भाई तपन   जी। ........ सादर 

Comment by ram shiromani pathak on December 11, 2013 at 7:03pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय भाई नीरज   जी। ........ सादर 

Comment by ram shiromani pathak on December 11, 2013 at 7:02pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय गोपाल  जी। ........ सादर 

Comment by ram shiromani pathak on December 11, 2013 at 7:01pm

बहुत बहुत आभार आदरणीया गीतिका जी। ........ सादर 

Comment by ram shiromani pathak on December 11, 2013 at 7:00pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय गिरिराज जी ,तात का अर्थ  पूज्य और बड़ा माननीय व्यक्ति(पिता,बड़े भाई आदि )। आपसदारी के लोगों व्  इष्ट-मित्रों के लिए आदरसूचक और प्रेमपूर्ण संबोधन। सादर 

Comment by Tapan Dubey on December 11, 2013 at 5:47pm
आदरणीय राम जी बहुत सुंदर दोहे, बधाई

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 11, 2013 at 5:07pm

आदरणीय राम भाई सुन्दर दोहों के लिये बधाई !!!! अंतिम दोहे को मै समझने मे असफल रहा ,  तात का अर्थ नही समझ पाया !!!!

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