For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ये कैसा नव शोणित है , जिसमे जीवन रस घोल नहीं |
जीवन बगिया में महके ऐसा , योवन सौरभ का शोर नहीं ||

सरबस लूटे कोई फिर भी , जिस रक्त में कोई उबाल न हो |
वह खून नहीं जल धारा है , जिसमें कोई मलाल न हो |

जो देश धर्म के लिए जिए ,वह जीवन है वह जीवन है |
जो मानवता के लिए मरे , वह मानव है वह मानव है ||

मानवता को मानव से यों , हमने ही तो दूर किया |
दानवता को लाकर के यहाँ , हमने ही मसहूर किया ||

देवत्व इसी से लुप्त हुआ , और दिल भी दया से रिक्त हुआ |
दान गया फिर छुप सा कहीं ,नहीं मानव की कोई शान रही ||

सत्य अहिंसा सिर्फ़ यहाँ तो , पुस्तक में ही शेष रही |
और भ्रष्टाचार के कीचड़ से ही , दुनियाँ ये आबाद हुई||

प्रजापाल ने अपने ही कर , प्रजा का संहार किया |
चिकनी चुपड़ी बातें करके , पीछे से ही वार किया ||

मानव दानव के अंतर को , हमनें ही तो पाट दिया |
देवत्व कहाँ से आएगा , जब मानवता को चांट लिया ||

हर मानव यह प्रण आज करें ,गर कोई मानवता पर वार करें |
उस पशु सम मानव जीवन को ,इस धरा भार से मुक्त करें ||

दया भाव का दरिया भी ,हर उर में सदा श्रन्गार करे |
खाए कसम हर जीवन में |हम मानवता से प्यार करें ||
"अप्रकाशित व मौलिक "

चौथमल जैन

Views: 469

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by विजय मिश्र on December 7, 2013 at 4:37pm
"मानवता को मानव से यों , हमने ही तो दूर किया |
दानवता को लाकर के यहाँ , हमने ही मसहूर किया ||

देवत्व इसी से लुप्त हुआ , और दिल भी दया से रिक्त हुआ |
दान गया फिर छुप सा कहीं ,नहीं मानव की कोई शान रही || "

उदेश्ययुक्त मानवता के जागरण का उद्घोष करती एक सार्थक रचना हेतु अंतस से बधाई एवं आभार |
Comment by Meena Pathak on December 7, 2013 at 1:55pm

बहुत सुन्दर रचना, बधाई आप को 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on December 6, 2013 at 9:34pm

बढ़िया रचना.................

Comment by coontee mukerji on December 6, 2013 at 6:27pm

जो देश धर्म के लिए जिए ,वह जीवन है वह जीवन है |
जो मानवता के लिए मरे , वह मानव है वह मानव है.............बहुत सुंदर.

Comment by Shyam Narain Verma on December 6, 2013 at 11:30am
आपकी इस सुंदर प्रस्तुति पर सादर बधाई

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
14 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
" दोहा मुक्तक :  हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात  कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार…"
15 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"गजल*****करता है कौन दिल से भला दिल की बात अबबनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।*इक दौर वो…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"सादर अभिवादन।"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"स्वागतम"
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर नमस्कार, रास्तो पर तीरगी...ये वही रास्ते हैं जिन…"
yesterday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Tuesday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

 अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।। प्रेम लोक की कल्पना,…See More
Feb 8

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service