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ग़ज़ल- सारथी || कली बेजार है ||

कली बेजार है, अपनी नजाकत से

बला की खूबसूरत हैं, क़यामत से/१

अकेला हुस्न जो देखा सरे-महफ़िल

तो हम पहलू में जा बैठे शरारत से /२

ज़मीं पर चाँद उतरा है ख़ुशी है ; पर

सितारे ग़मज़दा हैं इस बगावत से /३

बदन सोने सरीखा है , अगर मानो 

जरा सा तिल लगा दूँ मैं, इजाजत से /४

बड़े खामोश रहते हो, वजह क्या है

समंदर दिल में रक्खा है हिफाजत से/५

सुना जो बागबां से आप का किस्सा

गुलिस्तां छोड़ आये हैं शराफ़त से /६

मेरी माँ फिक्रमंदी में, दुआगो है

के रख अल्लाह बेटे को मुहब्बत से /७

.................................................

वज्न: १२२२ १२२२ १२२२ 

सर्वथा मौलिक व अप्रकाशित 

 

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Comment by Baidyanath Saarthi on December 1, 2013 at 1:34pm

महानुभाव  vijay nikore जी ...कृतग्य हूँ आपका ! बहुत बहुत धन्यवाद जो ग़ज़ल को आपका स्नेह मिला ...विनीत नमन सहित :)

Comment by Baidyanath Saarthi on December 1, 2013 at 1:33pm

आदरणीय  राजेश 'मृदु' जी हार्दिक अभिनन्दन आपका ! बहुत मेहरबानी ...स्नेह देते रहिएगा ....सादर नमन सहित :)

Comment by vijay nikore on December 1, 2013 at 12:03pm

इस सुंदर गज़ल के लिए बधाई।

सादर,

विजय निकोर

Comment by राजेश 'मृदु' on November 30, 2013 at 1:39pm

आनंद आ गया आदरणीय, हार्दिक बधाई

Comment by Baidyanath Saarthi on November 30, 2013 at 11:38am

माननीया  coontee mukerji जी ...चरण स्पर्श ! आपने अपना आशीष दिया , ग़ज़ल सचमुच ही अभिभूत होगी ...बहुत बहुत धन्यवाद प्रेषित कर रहा हूँ ! सादर :)

Comment by coontee mukerji on November 29, 2013 at 3:17pm

अकेला हुस्न जो देखा सरे-महफ़िल

तो हम पहलू में जा बैठे शरारत से /२..........अच्छा कटाक्ष है

सुना जो बागबां से आप का किस्सा

गुलिस्तां छोड़ आये हैं शराफ़त से /.........बहुत खूब......दाद कूबूल करें सारथी जी.

सादर/कुंती.

Comment by Baidyanath Saarthi on November 29, 2013 at 3:12pm

श्रीमान  बसंत नेमा  साहब ...ह्रदय से असीम गहराइयों से आपका आभार ! ..नमन सहित :)

Comment by बसंत नेमा on November 29, 2013 at 11:50am

आ0 सारथी जी  बहुत  ख़ूब ग़ज़ल कही है आप ने .. सुंदर गजल के लिए हार्दिक बधाई  

Comment by Baidyanath Saarthi on November 29, 2013 at 10:55am

 vandana मैडम , इस स्नेहाशीष के लिए सादर धन्यवाद ! बहुत बढ़िया लगा , आपकी उपस्थिति बहुमूल्य है नाचीज के लिए ! सादर नमन सहित :)

Comment by Baidyanath Saarthi on November 29, 2013 at 10:53am

आदरणीय  Nilesh Shevgaonka साहब, जर्रा-नवाजी का शुक्रिया ! ममनून हु जनाब ! मैं तो सभी मोहतरम-हजरात की बातों पर अमल करता हूँ ..जो कुछ भी सीख रहा हूँ , इसी मंच से ! आप सब गुणीजन, ही तो मार्गदर्शक हैं ! मैं अति शीघ्र आप सबके निर्देशानुसार बदलाव करूँगा !...कोटिशः आभार निलेश साहब ...नमन सहित :)

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