For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तमाम रात गुजरने के बाद आते हैं

वो अपने यार को छलने के बाद आते हैं

दिलों में दर्द उभरने के बाद आते हैं

 

चमकते चाँद सितारे गगन में लगता है  

विरह की आग में जलने के बाद आते हैं

 

न कोई देख ले चेहरे की झुर्रियां यारों  

तभी वो खूब सँवरने के बाद आते हैं

 

हमारे दर्द भी करते हैं नौकरी शायद

हमेशा शाम के ढलने के बाद आते हैं

 

तुम्हारी याद के जुगनू भी बेबफा तुम से

तमाम रात गुजरने के बाद आते हैं ..............दीप...............

 

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 974

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on December 6, 2013 at 3:49pm

आदरणीय सौरभ सर जी सादर प्रणाम ..........आपकी प्रतिक्रिया मिलना सौभाग्य होता है किसी रचनाकार का बुरा मानने की औकात नहीं अपनी

हाँ  एक अनुरोध और निवेदन अवश्य है की इसीतरह उत्साहवर्धन और मार्गदर्शन करते रहें ताकि कलम चलती रहे और कुछ नया करती रहे ................ये स्नेह और आशीष यूँ ही बनाये रखिये

जय हो जय हो जय हो आपकी

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on December 6, 2013 at 3:38pm

आदरणीया डॉ प्राची जी, आदरणीय विजय निकोर सर जी सराहना और उत्साहवर्धन के लिए ह्रदय से धन्यबाद ये स्नेह और आशीष यूँ ही बनाये रखिये

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on December 6, 2013 at 3:37pm

आदरणीय राजेश सर जी .....कोशिश करूँगा के कुछ लिखूं जिसपे आपकी जय हो बारम्बार मिले .......स्नेह यूँ ही बनाये रखिये सादर आभार आपका

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on December 6, 2013 at 3:36pm

आदरणीय सूर्या बाली सर जी, आदरणीय श्यामनारायण जी, आप सभी का ह्रदय से धन्यवाद स्नेह यूँ ही बनांये रखिये सादर

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on December 6, 2013 at 3:34pm

आदरणीय अभिनव सर जी, आदरणीय विजय मिश्र जी, आदरणीय राम अवध जी, आदरणीय नीलेश जी, आप सभी की उत्साहवर्धक प्रतिक्रियाएं मिलीं मन प्रसन्न हो उठा, ये स्नेह यूँ ही बनाये रखिये सादर आभार आपका

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on December 6, 2013 at 3:32pm

आदरणीय धर्मेन्द्र सर, आदरणीया राजेश कुमारी जी ..आदरणीय राम भाई, आदरणीय अरुण भाई साहब इस हौसलाफजाई के लिए बहुत बहुत आभार स्नेह यूँ ही बनाये रखिये

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on December 6, 2013 at 3:31pm

आदरणीया गीतिका दीदी, आदरणीय नादिर खान साहब, आदरणीय गोपाल सर, आदरणीय शिज्जू जी, आदरणीया अलका जी, आदरणीय जीतेन्द्र जी आप सभी का उत्साहवर्धन और सराहना के लिए ह्रदय से धन्यवाद

स्नेह यूँ ही बनाये रखिये

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on December 6, 2013 at 3:28pm

आदरणीय गिरिराज सर. आदरणीया अन्नपूर्णा जी, आदरणीया मीना पाठक जी ....इस उत्साहवर्धन के लिए आपका ह्रदय से धन्यवाद स्नेह यूँ ही बनाये रखिये सादर आभार आपका


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 2, 2013 at 3:05am

बुरा न मानियेगा भाई संदीपजी.. कि आज आ पाया हूँ आपकी इस ग़ज़ल पर.

एक मतला और उसके साथ चार अश’आर.. इतने ही से लूट ले गये यार !! ..

शुभ-शुभ

Comment by vijay nikore on November 27, 2013 at 6:21am

खूबसूरत गज़ल कही है, आदरणीय संदीप जी। हार्दिक बधाई।

 

सादर,

विजय निकोर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
20 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
20 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Apr 3
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service