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ग़ज़ल - अक्षरों में खुदा दिखाई दे !

ग़ज़ल –

२१२२ १२१२ २२

अक्षरों में खुदा दिखाई दे

अब मुझे ऐसी रोशनाई दे |

 

हाथ खोलूं तो बस दुआ मांगूँ,

सिर्फ इतनी मुझे कमाई दे |

 

रोशनी हर चिराग में भर दूं ,

कोई ऐसी दियासलाई दे |

 

माँ के हाथों का स्वाद हो जिसमें,

ले ले सबकुछ वही मिठाई दे |

 

धूप तो शहर वाली दे दी है,

गाँव वाली बरफ मलाई दे |

 

बेटियों को दे खूब आज़ादी ,

साथ थोड़ी उन्हें हयाई दे |

 

तल्ख़ लहजा तमाम लोगों को,

मीर दे मीर की रुबाई दे |

 

दर्द होरी सा दे रहा है तो,

साथ धनिया सी एक लुगाई दे |

 

घूस के सौ दहेज़ से बेहतर,

अपने हाथों बनी चटाई दे |

       *सर्वथा मौलिक - अप्रकाशित .

       (c)&(p)  - अभिनव अरुण .

      

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Comment

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Comment by Abhinav Arun on November 15, 2013 at 9:45am

आपका स्नेह - आशीष प्राप्त हुआ , ह्रदय से शुक्रिया श्री गिरिराज जी 

Comment by Abhinav Arun on November 15, 2013 at 9:44am

आपने रचना का मान बढ़ाया आभारी हूँ श्री सुशील जी 

Comment by Abhinav Arun on November 15, 2013 at 9:43am

आभार आभार आभार श्री नीलेश जी 

Comment by Abhinav Arun on November 15, 2013 at 9:43am

अनुमोदन हेतु शुक्रिया श्री नीरज जी 

Comment by Abhinav Arun on November 15, 2013 at 9:43am

होरी - धनिया के प्रेम प्रतीत का शेर पसंद आया आभार और नमन आपका आ. शिज्जू जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on November 15, 2013 at 9:08am

//दर्द होरी सा दे रहा है तो,

साथ धनिया सी एक लुगाई दे |// वाह आदरणीय अभिनवजी इस शेर में आपने होरी और धनिया के प्यार को खूबसूरती से इस्तेमाल किया है

इस ग़ज़ल के लिये दाद कुबूल करें

Comment by Neeraj Neer on November 15, 2013 at 8:34am

बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल हुई है , भाव बहुत ही उम्दा ..

Comment by Nilesh Shevgaonkar on November 15, 2013 at 7:31am

वाह वाह वाह और वाह ... बहुत ख़ूब 

Comment by Sushil.Joshi on November 14, 2013 at 9:21pm

सुंदर शेरों से सुसज्जित इस भावपूर्ण प्रस्तुति हेतु बहुत बहुत बधाई आ0 अभिनव भाई जी.....


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 14, 2013 at 8:47pm

आदरणीय अभिनव अरुण भाई , बेहतरीन भावों को गज़ल मे बान्धा है आपने ,!!!! बहुत खूब !!!!!  बहुत बधाई !!!!

कृपया ध्यान दे...

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