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पियें मोरी अखियाँ श्याम रूप रस को

पियें मोरी अखियाँ श्याम रूप रस को ।

कण कण में देखें अपने सरबस को ।

शीश मोर मुकुट गले पुष्प माला ।

बड़ो प्यारो लागे मेरा नन्द लाला ।

ललचाये दिल मेरा उनके दरस को |

पियें मोरी अखियाँ श्याम रूप रस को ।

रेशम सी बालों कि लट प्यारी प्यारी ।

चन्दा से मुखड़े पे घटा कारी कारी ।

होंठ छलकाते हैं मधुर मय रस को ।

पियें मोरी अखियाँ श्याम रूप रस को ।

एक हाथ वंशी है तो दूजे लकुटिया ।

मोहताज़ उनकी मेरे मन की कुटिया ।

दिल से लगाऊं उनके चरणों की रज को ।

पियें मोरी अखियाँ श्याम रूप रस को ।

काले काले नैना हैं काली कमलिया ।

निहारा करूँ मै वो सूरत सवंलिया ।

पाया है मैंने जैसे अमृत कलस को ।

पियें मोरी अखियाँ श्याम रूप रस को ।

ग्यानी योगी संत जन पार नही पावें ।

वेद पुराण भी कह नेति नेति गावें |

गाउँ भला मै कैसे उनके सुयस को ।

पियें मोरी अखियाँ श्याम रूप रस को ।

मौलिक व अप्रकाशित

   नीरज 'प्रेम'

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on November 12, 2013 at 5:44pm

बहुत खूब भाई नीरज जी बधाई आपको 

Comment by वेदिका on November 12, 2013 at 5:38pm

कृष्णमय गीत कि प्रस्तुति पर बधाई प्रेषित है आ0 नीरज जी!

Comment by Dr Ashutosh Mishra on November 12, 2013 at 4:25pm

आदरणीय नीरज ,..कृष्णमय , कृष्ण के रंग में रंगी इस शानदार रचना के लिए बधाई स्वीकार करें 

Comment by विजय मिश्र on November 11, 2013 at 6:12pm
प्रेम और भक्ति भाव में पगी कृष्ण रस में डूबी रचना . यहाँ आप रमे हुए लगते हैं, आभार नीरजजी
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on November 10, 2013 at 11:52pm

बहुत सुंदर, मनभावन प्रस्तुति, बधाई स्वीकारें आदरणीय नीरज जी

Comment by ram shiromani pathak on November 10, 2013 at 10:22pm

बहुत बहुत ही  सुन्दर  प्रस्तुति बहुत बधाई आपको भाई नीरज जी । 

Comment by Neeraj Nishchal on November 10, 2013 at 9:41pm

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीया अन्नपूर्णा जी ।

Comment by Neeraj Nishchal on November 10, 2013 at 9:40pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय गिरि राज भंडारी जी ।

Comment by Neeraj Nishchal on November 10, 2013 at 9:38pm

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय गोपाल नारायण जी ।

Comment by annapurna bajpai on November 10, 2013 at 8:59pm

बहुत ही सुंदर भावों से युक्त भजन रचना , बहुत बधाई आपको आदरणीय नीरज जी । 

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