For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आपका वो मज़ाक अच्छा था

मिले तुम इत्तिफाक अच्छा था ।
हसरते दिल फिराक अच्छा था ।

मुझ से बोला कि प्यार है तुमसे ,
आपका वो मज़ाक अच्छा था ।

पाके खोया तुम्हे तो ये पाया ,
मै तनहा ही लाख अच्छा था ।

नज़रें फेरे जो तुमको देखा तो ,
लम्हा वो दर्द नाक अच्छा था ।

प्यार में मेरे हज़ारों कमियाँ ,
तेरा धोखा तो पाक अच्छा था ।

कस्मे वादे रहीं न रस्में वफ़ा ,
दिल दिल का तलाक अच्छा था ।

मौलिक व अप्रकाशित
नीरज

Views: 889

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 20, 2013 at 1:55pm

अच्छी प्रस्तुति हुई है नीरज जी, बधाई स्वीकार कर लेंगे |

Comment by वेदिका on November 12, 2013 at 2:34pm

कस्मे वादे रहीं न रस्में वफ़ा ,
दिल दिल का तलाक अच्छा था ।// बढ़िया कथ्य के साथ बढ़िया गजल है| बहर भी साथ होती तो बढ़िया होता|

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 7, 2013 at 5:07pm

AAP  TANHA  H I LAKH   ACHCHE HAIN

AAPKE LAFJE SHUMAR ACHCHE HAIN

Comment by वीनस केसरी on November 2, 2013 at 11:33pm

नीरज मिश्रा जे सुन्दर प्रयास है ... लय को और साध लें तो ग़ज़ल और सध जाए

Comment by बृजेश नीरज on November 1, 2013 at 7:42pm

भाई जी अगर बहर भी लिख देते तो अच्छा होता.

आपके इस कहन पर आपको हार्दिक बधाई!

Comment by Ravi Prabhakar on November 1, 2013 at 6:11pm

आदरणीय नीरज मिश्रा जी,
आपके अंदाज-ए-बयां का तो मैं कायल हो गया। बहुत खूबसूरज ग़ज़ल कही आपने।
एक-एक शब्द उनकी बेवफाई पर कटाक्ष करता है, बहुत खूब।
पाके खोया तुम्हे तो ये पाया ,
मै तनहा ही लाख अच्छा था ।
ग़ज़ल का बेहतरीन हिस्सा है। उत्कृष्ट रचना सृजन के लिए दिल की गहराइयों से शुभकामनाएं
स्वीकार करें। आपकी और प्र्रस्तुतियों का ब्रेसब्री से इंतजार रहेगा।

Comment by राजेश 'मृदु' on October 31, 2013 at 2:52pm

जय हो, दाद कबूलें इस सुंदर प्रस्‍तुति पर, सादर

Comment by ram shiromani pathak on October 30, 2013 at 8:24pm

मिले तुम इत्तिफाक अच्छा था । 
हसरते दिल फिराक अच्छा था ।

मुझ से बोला कि प्यार है तुमसे ,
आपका वो मज़ाक अच्छा था ।

वाह  भाई वाह ज़ोरदार ग़ज़ल  ////// बहुत बहुत   बधाई आपको आ0 नीरज जी । 

Comment by annapurna bajpai on October 30, 2013 at 6:26pm

खूबसूरत  गजल के लिए बधाई आपको आ0 नीरज जी । 

Comment by विजय मिश्र on October 30, 2013 at 4:04pm
"पाके खोया तुम्हे तो ये पाया ,
मै तनहा ही लाख अच्छा था ।" बहुत खूबसूरत गजल ,नीरजजी बधाई लें .

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

sushil yadav posted blog posts
Monday
Sushil posted blog posts
Monday
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Monday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service