For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मैं ग़ज़ल लिखूँ या गीत लिखूँ ? (राज)

छंदों की फुहार हैं भीगे अशआर हैं

कहे कलम क्या; सृजन करूँ ?

मैं ग़ज़ल लिखूँ  या गीत लिखूँ ?

 

जो नित नए रंग बदलते हों

पल पल में साथ बदलते हों

नूतन  परिधानों की मानिंद

हर दिन नव हाथ बदलते हों

उन अपनों को क्या लिखूँ?   

रकीब लिखूँ  या कि मीत लिखूँ   

मैं ग़ज़ल लिखूँ  या गीत लिखूँ ?

 

यहाँ मजनू भी हैं लैला भी

और  शीरी भी फरहाद भी

यहाँ फिरते दिल बिखरे-बिखरे

सुन रहे हैं प्रेम जिहाद भी

इस चाहत को  क्या लिखूँ?   

मैं इश्क लिखूँ  या प्रीत लिखूँ  

मैं ग़ज़ल लिखूँ  या गीत लिखूँ ?

 

ये धर्म के बीच खड़ी होती

कभी दिलों बीच अड़ी होती

और कभी बनाती ताज महल

कभी बगड़ बीच खड़ी होती

इस वितरक को क्या लिखूँ  

दीवार लिखूँ  या भीत लिखूँ  

मैं ग़ज़ल लिखूँ  या गीत लिखूँ ?

 

कहीं मैदान  कहीं पहाड़ हैं

और फूलों भरी  कतार हैं

कहीं कहीं ठिठुरते हैं पीपल  

कहीं बर्फ ढके चिनार हैं  

इस मौसम को क्या लिखूँ?  

ऋतु शरद लिखूँ  या शीत लिखूँ  

मैं ग़ज़ल लिखूँ  या गीत लिखूँ  ?

 

कुछ पाया भी कभी खोया भी

कुछ काटा भी कुछ बोया भी

कभी खुशियों से दमका मुखड़ा

कभी अश्रुओं से धोया भी

इस जीवन को क्या लिखूँ?  

निज  हार लिखूँ  या जीत लिखूँ

मैं ग़ज़ल लिखूँ  या गीत लिखूँ  ?

**************************************

अप्रकाशित एवं मौलिक 

Views: 765

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 2, 2013 at 8:45pm

प्रिय महिमा श्री आपको गीत पसंद आया आपकी सराहना पाकर गीत धन्य हुआ हार्दिक आभार आपका 

Comment by MAHIMA SHREE on October 2, 2013 at 8:42pm

मैं ग़ज़ल लिखूँ  या गीत लिखूँ  ?.... वाह बहुत सुंदर दी ... कसमकस में भी बहुत कुछ लिख दिया ....:)) बधाई स्वीकार करें


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 2, 2013 at 8:06pm

आदरणीय दीपक नगैच जी गीत पर आपकी प्रतिक्रिया पाकर हर्षित हूँ मेरा लिखना सार्थक हुआ हृदय तल से आभार आपका 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 2, 2013 at 8:04pm

नीरज कुमार जी आपको गीत पसंद आया इस उत्साह वर्धन हेतु दिल से आभारी हूँ .

Comment by D.K.Nagaich 'Roshan' on October 2, 2013 at 4:33pm

बहुत ही शानदार .. मधुर, और  सुंदर प्रवाह में रची हुई  रचना .. आदरणीया  राजेश  कुमारी  जी  ...बहुत  बधाई  आपको  

Comment by Neeraj Neer on October 2, 2013 at 4:17pm

वाह बहुत सुन्दर गीत लिखा है आपने .बधाई .  आदरणीय राजेश कुमारी जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 2, 2013 at 9:51am

जितेंद्रे गीत जी आपको प्रस्तुति पसंद आई इस उत्साह वर्धन के लिए हार्दिक आभार 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 2, 2013 at 9:51am

भाई शिज्जू शकूर जी आपकी ज़र्रानवाज़ी से गीत धन्य हुआ इस उत्साह वर्धन के लिए दिल से आभार 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 2, 2013 at 9:41am

गीत हो या गजल, रचना में बड़ी ही खूबसूरती से इस कश्मकश का आपने सजीव चित्रण किया, बहुत बहुत बधाई आदरणीया राजेश जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on October 2, 2013 at 7:42am

आदरणीया राजेश दीदी आप गीत लिखें या ग़ज़ल लिखें अच्छी ही होती हैं कश्मकश के भावों को आपने खूबसूरती से शब्दों में ढाला है, दिली दाद कुबूल करें

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
1 minute ago
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
10 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"अमराई में उत्सव छाया,कोयल को न्यौता भिजवाया। मौसम बदले कपड़े -लत्ते, लगे झूमने पत्ते-…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"ठण्ड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं बौराने। पंछी गाते सुर में…"
Tuesday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"लघुकथा किसी विसंगति से उभरती है और अपने पीछे पाठको के पीछे एक प्रश्न छोड़ जाती है। सबकुछ खुलकर…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service