For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल - इल्म की रोशनी नहीं होती !

ग़ज़ल –

२१२२   १२१२   २२

इल्म की रोशनी नहीं होती ,

ज़िन्दगी ज़िन्दगी नहीं होती |

 

एक कोना दिया है बच्चों ने ,

और कुछ बेबसी नहीं होती |

 

रंग आये कि सेवई आये ,

तनहा कोई ख़ुशी नहीं होती |

 

दिल के टूटे से शोर होता है ,

ख़ामुशी ख़ामुशी नहीं होती |

 

सारे चेहरे छुपे मुखौटों में ,

दिल में भी सादगी नहीं होती |

 

माँ के आँचल से दूर हैं बच्चे ,

बाप से बंदगी नहीं होती |

 

जी हुज़ूरी करूँ सलामी दूं ,

मुझसे ये नौकरी नहीं होती |

 

झूठ छाया है हर रिसाले में ,

सच की सुर्खी कभी नहीं होती |

 

*दौरे हाज़िर भी एक बवंडर है ,

आँधियों की कमी नहीं होती |

*संशोधित 

(मौलिक और अप्रकाशित)

        - अभिनव अरुण 

          [१२०९२०१३]

Views: 1504

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Abhinav Arun on September 14, 2013 at 9:31am

आ. श्री वीनस जी आपकी कक्षाओं से शिल्प सीख रहा हूँ वरना मैं तो ग़ज़ल लिख रहा था कह कहाँ रहा था ?? ..सो बहुत आभार आपका .. मेरी ग़ज़लों में बस भाव - कहन मेरे और अगर इश्क वाल लव की तरह शिल्प वाला शेर है तो वो आपका आपके नाम ..आभार और नमन आपका !! 

..खामुशी को पढने बोलने में अलग ही आनंद है दिल से साथी पढ़ बोल कर देखें और यहाँ बहर में बैठ गया सो खामुशी है ..वरना मैं भी खामोश ही रहता :-)

Comment by Abhinav Arun on September 14, 2013 at 9:28am

दौरे हाज़िर भी एक बवंडर है ,

आँधियों की कमी नहीं होती |

           ... आ. बागी जी सही कहा ध्यान नहीं गया अगर आखिरी शेर को इस तरह कर दें तो तागाफुले रदीफ़ से बचा जा सकता है डायरी में ठीक कर लिया है ! सादर आभार सहित !!

Comment by Abhinav Arun on September 14, 2013 at 9:20am

आदरणीय श्री बागी जी ग़ज़ल की सराहना के लिए धन्यवाद ..जी हजुरी वाला शेर बस मिज़ाज का शेर है ...कह दिया सो कह दिया .... हां ये भी सत्य है आज रोटी रोज़ी हकीकत है वरना कोहराम मचाना हमें भी खूब आता है :-) आभार !!


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 14, 2013 at 9:05am

//

जी हुज़ूरी करूँ सलामी दूं ,

मुझसे ये नौकरी नहीं होती |//

आय हाय हाय, क्या बात कही है आदरणीय अभिनव भाई जी, दिल जीत लिया, खूबसूरत ख्याल, सभी अश आर बढ़िया लगे, अंतिम शेर पर तवज्जो चाहूँगा, तकाबुले रदिफ़ दोष लक्षित है |

बहुत बहुत बधाई प्रेषित है इस ग़ज़ल पर |

Comment by वीनस केसरी on September 13, 2013 at 7:40pm

खामोशी (मूल शब्द) २२२
खामोशी (खामुशी अनुसार) २१२

खामोशी (खमोशी अनुसार) १२२

अपवाद स्वरूप ग़ज़ल में तीनों स्वीकार्य है इसका कोई नियम में उल्लेख नहीं मिलेगा ...
जैसे तरह १२ को (तर्ह अनुसार) २१ भी सर्व स्वीकार्य है, इसका भी कोई नियम नहीं है ...
ये नियम के वो अपवाद हैं जो किसी न किसी रूप में हर विधा में मिलते हैं ....

सादर

Comment by annapurna bajpai on September 13, 2013 at 6:38pm

आदरणीय अभिनव अरुण जी अच्छी गज़ल हुई है बधाई स्वीकारें ।

Comment by अरुन 'अनन्त' on September 13, 2013 at 3:20pm

वाह वाह आदरणीय अरुण भाई जी लाजवाब ग़ज़ल कही है आपने आनंद आ गया पढ़कर बहुत बहुत बधाई स्वीकारें.

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on September 13, 2013 at 2:00pm

सारे चेहरे छुपे मुखौटों में ,

दिल में भी सादगी नहीं होती |.......वाह ! क्या कहने, चेहरों पे सादगी हो तो क्या, दिल में सादगी ही नही

बहुत ही उम्दा गजल , तहे दिल से दाद कुबूल कीजिये आदरणीय अभिनव अरुण जी

Comment by मोहन बेगोवाल on September 13, 2013 at 1:39pm

अरुण भाई,

बहुत अच्छी गजल - बधाई हो 

सारे चेहरे छुपे मुखौटों में ,

दिल में भी सादगी नहीं होती | ये शे'र बहुत अच्छा लगा 

Comment by बृजेश नीरज on September 13, 2013 at 11:56am

आदरणीय गिरिराज जी,
यही तो मसला है। हम हिन्दी में गजल लिखते समय उर्दू शब्दकोश क्यों देखें। उर्दू शब्दकोश उर्दू लिपि के लिए है। देवनागरी लिपि के लिए तो नहीं है। जब हम हिन्दी में गजल लिखते हैं तो क्या यह बेहतर नहीं कि हम उन्हें उनके सही रूप में लिखें। उच्चारण के समय मात्रा गिरा लें?
हिन्दी छंद विधान में का, के, जैसे कारकों की मात्रा गिराने का विधान है लेकिन हम लिखते तो उन्हें सही रूप में ही हैं?
सादर!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Sunday
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Saturday
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Saturday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Jun 12
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Jun 11

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Jun 6

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service