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पीछे मुड़ के नहीं देखना

जाने क्या क्या लोग कहेंगे , किस किस को समझाओगे ,
जिसको वफ़ा समझते हो, उस गलती पर पछताओगे ।

हँसते चेहरे ,सुंदर चेहरे , कितने भोले - भाले चेहरे ,
इस तिलिस्म में पड़े अगर तो , बाहर न आ पाओगे ।

आसमान  में  उड़ो  परिंदे , पंखों पर विश्वास करो ,
इस से ज्यादा खिली धूप और खुली हवा कब पाओगे ।

भींगी पलकें , उतरे चेहरे , वो सपनो का गाँव , गली ,
पीछे  मुड़  के नहीं  देखना, पत्थर  के  हो  जाओगे ।

चलो उठो दो चार कदम ही , उस सागर की ओर बढ़ो ,
शबनम के कतरों को पी कर , कब   तक प्यास बुझाओगे।

फूलों की  शोखी है तुम में , ये  तो हमने  मान लिया ,
फूलों के काँटों की फितरत ,अब किस दिन दिखलाओगे ।

चलो तुम्हारा नाम न लेंगे , गज़लों में अशआरों में ,
लेकिन जब हम तनहा होंगे , तब तुम याद तो आओगे ।

बादल, बरखा , जाड़ा, गरमी , आँसू, यादें, दिन और रात ,
सब आते रहते हैं लेकिन , तुम  जाने  कब आओगे ।

'शेखर' जब जब याद करेगा, तुम भी रह ना पाओगे ,
दिल में धड़कन और आँखों में आंसू बन कर आओगे| 

मौलिक एवं अप्रकाशित

अरविन्द भटनागर ' शेखर'

Views: 838

Comment

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Comment by Meena Pathak on September 9, 2013 at 11:07pm

बहुत खूब ... बधाई आप को


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 9, 2013 at 10:48am
आदरणीय अरविन्द भाई ,इस लाजवाब रचना के लिये बधाई !!!!!

फूलों की शोखी है तुम में , ये तो हमने मान लिया ,
फूलों के काँटों की फितरत ,अब किस दिन दिखलाओगे । ------ बेमिसाल !!
Comment by aman kumar on September 9, 2013 at 9:22am

दिल में धड़कन और आँखों में आंसू बन कर आओगे| 

भावपूर्ण प्रस्तुति !

अति सुंदर !

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on September 9, 2013 at 8:48am

बादल, बरखा , जाड़ा, गरमी , आँसू, यादें, दिन और रात ,
सब आते रहते हैं लेकिन , तुम  जाने  कब आओगे ।

अरविन्द भाई, राधे-राधे ॥ गणेश चतुर्थी की शुरुवात इतने भावपूर्ण गीत से होगी सोचा न था, हार्दिक बधाई।

Comment by ARVIND BHATNAGAR on September 9, 2013 at 8:17am

dhanyavaad , Vandana ji....

Comment by vandana on September 9, 2013 at 6:17am

आसमान  में  उड़ो  परिंदे , पंखों पर विश्वास करो ,
इस से ज्यादा खिली धूप और खुली हवा कब पाओगे ।

भींगी पलकें , उतरे चेहरे , वो सपनो का गाँव , गली ,
पीछे  मुड़  के नहीं  देखना, पत्थर  के  हो  जाओगे ।

बहुत बढ़िया आदरणीय 

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