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घोटाले कर कर हुई, भ्रष्ट आज सरकार

जनता डर डर रह रही, संसद भी बीमार

संसद भी बीमार, मिलै नहि मोहे चैना  

जुल्मी है सरकार, बड़ा मुश्किल है रहना 

कह सागर सुमनाय, काम तो इनके काले  

खाना बांटे मुफ्त, करे नित नए घोटाले 

आशीष श्रीवास्तव - सागर सुमन
मौलिक एवं अप्रकाशि

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Comment by Ashish Srivastava on September 3, 2013 at 8:06pm

विजय मिश्र : सादर आभार 

Comment by विजय मिश्र on September 2, 2013 at 11:58am
"जड़ा तमाचा गाल पर , लाल दाग परि जाय
असर न हो बेशर्म को , शर्म बेचि के खाय |-- वाह रे कवि ! तुम धन्य हो .
Comment by विजय मिश्र on September 2, 2013 at 11:57am
"जड़ा तमाचा गाल पर , लाल दाग परि जाय
असर न हो बेशर्म को , शर्म बेचि के खाय |-- वाह रे कवि ! तुम धन्य हो .
Comment by Ashish Srivastava on September 2, 2013 at 7:52am

आदरणीय  विजय मिश्र  जी 

बधाई और संवेदनात्मक टिप्पनि के लिए हार्दिक आभार 

जड़ा तमाचा गाल पर , लाल दाग परि जाय

असर न हो बेशर्म को , शर्म बेचि के खाय  

Comment by विजय मिश्र on August 28, 2013 at 11:52am
छंद है या तमाचा ? जड़ा भी आपने गाल पर ही है ,असर न भी हो लाल दाग तो जरूर दिखेगा !रचना शुद्ध सामयिक और सच की धारणा के साथ .हार्दिक बधाई आशीषजी .
Comment by Ashish Srivastava on August 28, 2013 at 11:16am

aadarniya annapurna bajpai ji , arun ji ,  evam  bhandari ji , aap sabhi ko hraday se naman ki kundli vidha par likhne par aapne jo sneh rupi marg prshahst kiya hai . 

Comment by annapurna bajpai on August 27, 2013 at 11:05pm

आ० आशीष जी सुंदर भावों को बड़ी सहजता से पिरोया है , आपको बधाई । 

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 27, 2013 at 3:57pm

बेहद सुन्दर कुण्डलिया छंद भाई आशीष ढेरों बधाई स्वीकारें.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 27, 2013 at 1:41pm

आशीष भाई , उम्दा प्रस्तुति , बधाई !!

Comment by Ashish Srivastava on August 27, 2013 at 1:23pm

रविकर

sarahna ke liye aabhar 

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