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प्यास के मारों के संग ऐसा कोई धोका न हो

दोस्तों, पिछले डेढ़ महीने, मंच से नादारद था  ... एक ताज़ा ग़ज़ल के साथ पुनः हाज़िरी दर्ज करता हूँ ....

प्यास के मारों के संग ऐसा कोई धोका न हो
आपकी आँखों के जो दर्या था वो सहरा न हो 

उनकी दिलजोई की खातिर वो खिलौना हूँ जिसे
तोड़ दे कोई अगर तो कुछ उन्हें परवा न हो

आपका दिल है तो जैसा चाहिए कीजै सुलूक

परा ज़रा यह देखिए इसमें कोई रहता न हो

पत्थरों की ज़ात पर मैं कर रहा हूँ एतबार

अब मेरे जैसा भी कोई अक्ल का अँधा न हो

ज़िंदगी से खेलने वालों जरा यह कीजिए

ढूढिए ऐसा कोई जो आखिरश हारा न हो

वीनस केसरी

मौलिक एवं अप्रकाशित

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन / फ़ाइलान

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Comment

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Comment by विवेक मिश्र on August 12, 2013 at 11:08pm
/आपका दिल है तो जैसा चाहिए कीजै सुलूक
पर ज़रा यह देखिए इसमें कोई रहता न हो /
इस शे'र की नज़ाकत और सादाबयानी पर ट्रक भरकर दाद दे रहा हूँ। भारी भरकम शब्दों का इस्तेमाल किये बिना आला दर्ज़े ग़ज़ल कहना सीखना हो, तो आपकी यह ग़ज़ल मिसाल के तौर पर पेश की जा सकती है।
Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on August 12, 2013 at 10:06pm

बहुत खूबसूरत अश’आर हैं वीनस जी। दाद कुबूल करें

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 12, 2013 at 9:26pm

आ0 वीनस भाई जी, अप्रतिम खूबसूरत गजल। वाह! वाह!...//ज़िंदगी से खेलने वालों जरा यह कीजिए
ढूढिए ऐसा कोई जो आखिरश हारा न हो//---- लाजवाब!... हृदयतल से आपको ढेरों बधाईयां। सादर,


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on August 12, 2013 at 10:45am

//ज़िंदगी से खेलने वालों जरा यह कीजिए

ढूढिए ऐसा कोई जो आखिरश हारा न हो // वाह बहुत खूब 

भाई वीनस जी आप की हर ग़ज़ल उम्दा होती उसपे कुछ भी कहना सूरज को दिया दिखाने के समान होता है, इस ग़ज़ल के लिए दिली दाद क़ुबूल फरमाएँ


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 12, 2013 at 10:25am
लाजवाब बात कही भाई
आपका दिल है तो जैसा चाहिए कीजै सुलूक
परा ज़रा यह देखिए इसमें कोई रहता न हो
Comment by Sulabh Agnihotri on August 12, 2013 at 9:49am

आपका दिल है तो जैसा चाहिए कीजै सुलूक
परा ज़रा यह देखिए इसमें कोई रहता न हो
वाह! वाह! क्या बात है। पूरी ग़ज़ल ही बहुत सुन्दर बन पड़ी है।

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