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!!! निरगुन !!!

मन है मेरा गंगा-जमुना,
तन वृन्दावन भाए।

नील गगन से नयनागर मे,
नटवर की छवि पाऊं प्रियतम!
नयन नीर छलकाए।

मन मन्दिर में मनमोहन सी,
मूरत सदा बसाऊं प्रियतम!
मन चंचल भरमाए।

सुध-बुध खोकर बुध्दि विचारूं,
ज्ञान-विराग लुटाऊं प्रियतम!
पग-पग नृत्य कराए।

निश-दिन तेरी ज्योति निहारूं,
लौ आत्मा से पाऊं प्रियतम!
यह तन दीप सुहाए।

प्रेम दया करूणाकर तुम हो,
सदा प्रेम रस गाऊं प्रियतम!
वचन भजन बन जाए।

मानसरोवर के हंसा तुम,
मैं अति पाप कहाऊं प्रियतम!
दया-क्षमा चितलाए।

मन सुख है गंगा की धारा,
तन भव नाव कहाऊं प्रियतम!
नाम सुमिर तर जाएं।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by राजेश 'मृदु' on August 12, 2013 at 4:11pm

बहुत ही सुंदर भक्तिमय प्रस्‍तुति हुई है मित्रवर, ढेरों बधाईयां

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 11, 2013 at 5:27pm

आदरणीय केवल जी, सुंदर शब्दों से पिरोई सुंदर रचना पर, हार्दिक बधाई स्वीकारें

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 11, 2013 at 3:47pm

आ0 अरून अनन्त भाई जी,  सादर प्रणाम! आपके स्नेह, आत्मीयता और उदारता के लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया व हार्दिक आभार।  सादर, 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 11, 2013 at 3:46pm

आ0 नीरज भाई जी,  सादर प्रणाम! आपके स्नेह, कविता प्रेम और उदारता के लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया व हार्दिक आभार।  सादर, 

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 11, 2013 at 12:19pm

वाह वाह आदरणीय केवल भाई जी मन खुश कर दिया बेहद सुन्दर रचना हार्दिक बधाई स्वीकारें

Comment by Neeraj Nishchal on August 11, 2013 at 11:10am
क्या कहूँ केवल प्रसाद
जी आपकी कविता तो
प्रभु का प्रसाद लगती है
कविता की सुन्दरता
कितनी असीम होती है
और कितनी पवित्रता
उस से झलक सकती है
ये आपकी कविता को
पढकर महसूस होता है ।
सादर प्रणाम _/\_
Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 10, 2013 at 10:15pm

आ0 संदीप भाई जी,     सादर प्रणाम!   आपके स्नेह और आशीष वचन के लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया व हार्दिक आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 10, 2013 at 10:14pm

आ0 विजय सर जी,     सादर प्रणाम!   आपके स्नेह, सुन्दर विचार और आशीष वचन के लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया व हार्दिक आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 10, 2013 at 10:12pm

आ0 अन्नपूर्णा जी,  आपके स्नेह और आशीष वचन के लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया व हार्दिक आभार। सादर,

Comment by annapurna bajpai on August 10, 2013 at 7:10pm

sundar nirgun rachna hetu bahut badhai adarniy kewal bhai ji .

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