For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

!!! हरिगीतिका !!!


2+3+4+3+4+3+4+5= 28
चौकल में जगण-121 अतिनिषिध्द है। चरण के अन्त में रगण-212 कर्ण प्रिय होता है।

जब मेघ बरसे रात तड़फे पीर है मन वेदना।
तन तीर धसती घाव करती राह निश-दिन देखना।।
अब आव प्रियतम भोर होती भ्रमर तन-मन छेदता।
रति-सुमन हॅसकर हास करती सुर्ख सूरज देवता।।1

चिडि़यां चहक कर तान कसती बांग मुर्गा टीसते।
बन-बाग-उपवन खूब झूमें मोर-दादुर रीझते।।
घर नीम छाया धूप माया उमस करती ताड़ना।
नय नीर छलके भाव बहके घाट-नदिया बांध ना।।2

कहुं प्रेम पाती जान खाती रोज आंखें लाल सी।
रतनार न्यारी सांझ प्यारी कोर काजल काल सी।।
यह चांद-तारे आग धारे चांदनी बस घूरती।
संकल्प-यादें सूक्ति-बातें राजदारी पूछती।।3

अब शोक हिचकी रूदन सिसकी आंसुओं की धार है।
चहुं ओर देखो ताल-नदिया लहर सागर मार है।।
जब आंख खुलती आस बॅधती गाय बछड़ा चाटती।
खा घास-चोकर दूध देकर प्रेम-समता बांटती।।4

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 842

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 14, 2013 at 8:45pm

आ0 सौरभ सर जी,  आपके स्नेह और उत्सुक्ता के प्रति मैं श्रध्दानत हूं। भला मैं आपको क्या दे सकता हूं? मैनें तो आपसे सदैव लिया ही है। ऐसा व्यवहार मैने छन्द प्रभाकर पुस्तक में ही पढ़ी है।  सादर

2+3+4+3+4+3+4+5= 28 ........ इसका अर्थ क्या हुआ भाई केवल प्रसाद जी ? कृपया स्पष्ट करें.---//आ0 सर जी, इसको वर्णिक छन्द के आधार पर लिया गया है।//यह केवल सहजता के लिए अपनाया गया होगा...? जैसा कि मैने पढ़ा है।//
हरिगीतिका के संदर्भ में इतनी ही बात ध्यान पर रखें कि इसके पदों की पाँचवीं, बारहवीं, उन्नीसवीं और छब्बिसवीं मात्रा लघु होनी है तथा पदान्त रगण (ऽ।ऽ) हो तो अति उत्त्म अन्यथा लघु लघु गुरु यनि सगण (।।ऽ) भी चलता है, निर्भर करता है कि द्विकल या चौकल कैसा व्यवहार कर रहे हैं.----//प्रस्तुत छंद में 5,12,19 और 26वीं मात्रा लघु ही हैं।//
मूर्गे की बाँग को टीस की तरह कब सुने हैं भाई ? --//विरही मन को वह सारे सुखद बिम्ब दर्द भरे ही लगते या अनुभव करती है।      व ास्तविकता भी हो सकती है...जो व्यक्ति देर रात में सोता है और उसे प्रातः काल में कोई व्यवधान करता है तो बुरा ही लगता है।//
वैसे आपने त्रिभंगी या चवपैया छंदो की तरह पदों के शब्द संयोजन में तुक साधने की कोशिश की है. इससे गेयता बढ़ी ही है.-----//मेरे मस्तिष्क में ...श्रीराम चंद्र कृपाल भजमन......। ही चल रहा था।//

 सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 14, 2013 at 2:27pm

2+3+4+3+4+3+4+5= 28 ........  इसका अर्थ क्या हुआ भाई केवल प्रसाद जी ?  कृपया स्पष्ट करें.

हरिगीतिका के संदर्भ में इतनी ही बात ध्यान पर रखें कि इसके पदों की पाँचवीं, बारहवीं, उन्नीसवीं और छब्बिसवीं मात्रा लघु होनी है तथा पदान्त रगण  (ऽ।ऽ) हो तो अति उत्त्म अन्यथा लघु लघु गुरु  यनि सगण (।।ऽ) भी चलता है, निर्भर करता है कि द्विकल या चौकल कैसा व्यवहार कर रहे हैं.

मूर्गे की बाँग को टीस की तरह कब सुने हैं भाई ? 

वैसे आपने त्रिभंगी या चवपैया छंदो की तरह पदों के शब्द संयोजन में तुक साधने की कोशिश की है. इससे गेयता बढ़ी ही है.

सधन्यवाद

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 12, 2013 at 9:09pm

आ0 विजय निकोर सर जी,  आपका स्नेह और आशीष पाकर मेरी छंद रचना सार्थक हुई। आपके स्नेहाशीष के लिए आपका हृदयतल से बहुत बहुत आभार।  सादर,

Comment by vijay nikore on August 12, 2013 at 7:32am

अति सुन्दर, आदरणीय केवल प्रसाद जी।

बधाई।

 

सादर,

विजय निकोर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 11, 2013 at 3:27pm

आ0 अरून अनन्त भाई जी,  आपका स्नेह और प्रोत्साहन से रचना कर्म को संतुष्टि मिली।  आपका तहेदिल से शुक्रिया व हार्दिक आभार।  सादर, 

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 11, 2013 at 3:09pm

आदरणीय केवल भाई जी वाह बेहद सुन्दर हरिगीतिका क्या कहने हार्दिक बधाई स्वीकारें

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 10, 2013 at 10:11pm

आ0 अन्नपूर्णा जी,     सादर प्रणाम!   आपके स्नेह और आशीष वचन के लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया व हार्दिक आभार। सादर,

Comment by annapurna bajpai on August 10, 2013 at 7:07pm

अब शोक हिचकी रूदन सिसकी आंसुओं की धार है।
चहुं ओर देखो ताल-नदिया लहर सागर मार है।।
जब आंख खुलती आस बॅधती गाय बछड़ा चाटती।
खा घास-चोकर दूध देकर प्रेम-समता बांटती।।4................................ये पंक्तियाँ मुझे बेहद अच्छी लगी आ० केवल भाई जी कितना सुंदर वर्णन किया है आपने । खा घास चोकर दूध देकर गाय प्रेम समता बांटती । गाय कभी कोई विषमता नहीं करती वो तो हम इंसान ही ऐसे है जो हर जगह सम और विषम भाव रखते है । बहुत बधाई आपको इस सुंदर रचना कर्म के लिए ।

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 10, 2013 at 2:51pm

आ0 भण्डारी जी,  आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका तहेदिल से आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 10, 2013 at 2:50pm

आ0 शेखर भाई जी,  आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका तहेदिल से आभार।  सादर,

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Friday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Friday
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Jun 5
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service