For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

राजू मोबाइल से गाना सुनने में मस्त था- "वो इक लड़की थी जिसे मैं प्यार करता था।"
तब तक उसके कानों में पिता जी की आवाज गूंजी- "सूरदास का पद नहीं सुन सकते थे क्या? या मीरा, तुलसी, कबीर का भजन सुनते?"
राजू डर गया और उसने गाना सुनना बंद कर दिया।
दो दिन बाद की बात है पिता जी अपने मोबाइल से गीत सुन रहे थे-"धूप में निकला न करो रूप की रानी, गोरा रंग काला न पड़ जाये।"
तब तक उनके कानों में आवाज गूँजी- "पिता जी! यह किसका पद या भजन है?"

मौलिक व अप्रकाशित
(संशोधित)

Views: 1423

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on July 11, 2013 at 4:46pm
आदरणीय गुरुजनवृंद ( विशेषकर आदरणीय वीनस जी को सम्बोधित ) ! //यह अस्वाभाविक है। न तो पिता अभी इतने दकियानूस हुए हैं और न ही पुत्र इतने मुँहफट हुए हैं।//
आदरणीय यह कथा बिल्कुल मेरे पड़ोस की है। और जहाँ मुझे कथा मिली वह कोई और नहीं बल्कि कथा का पात्र राजू है। उसके इसी प्रश्न पर पिता जी ने उसे चार हाथ जमा दिया था। और वह पिटा हुआ बाग में बैठा था जहाँ मैं पहुँच गया। तब उसने अपनी कथा बतायी, और मैंने उसी के शब्दों में इसे व्यक्त कर दिया।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 11, 2013 at 4:12pm

//खुबसूरत लेकिन बच्चे के मुख से ये निकलना चाहिए था ,. पिता जी ये किसके पद हैं ?//

भाई रवि जी ने संयत सटीक और सार्थक सुझाव दिया है.  हार्दिक बधाई

Comment by Rash Bihari Ravi on July 11, 2013 at 4:09pm

खुबसूरत लेकिन बच्चे के मुख से ये निकलना चाहिए था ,

पिता जी ये किसके पद हैं ?

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 11, 2013 at 4:01pm

भाई जी यह चुटकुला होता तो मैं मान भी लेता अन्य सभी ने सब कुछ कह ही दिया है.

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 11, 2013 at 3:59pm

asambhav ............ye kathaa padh niraasha huee ...........


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 11, 2013 at 3:42pm

यह कथा है ? वह भी विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय जी की कलम से, निराशा हुई ! 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 11, 2013 at 3:30pm

भाईजी, यह रचना तो यहाँ प्रस्तुत हुई दीख रही है !

फिर आपने आज मुझसे इस रचना पर कैसा व्यक्तिगत सुझाव मांगा है ?  हम पूछ इस लिए रहे हैं कि जब मेरे सुझावों की प्रतीक्षा ही भारी पड़े और रचना प्रस्तुत हो जाये तो मेरे सुझावों की आवश्यकता ही क्या है ! जबकि मैंने मात्र दस मिनटों में आपके पत्र का प्रत्युत्तर दिया था ! भला होता आपने अपनी इस रचना का मात्र लिंक दे दिया होता, यह कर कि रचना प्रकाशित हो गयी है, आप टिप्पणी दें. 

अव्वल तो मैं स्वय ही समयानुसार रचनाओं पर प्रतिक्रिया देता हूँ. 

भाईजी,  मै आपके उक्त पत्र तथा अपने उत्तर को सार्वजनिक कर रहा हूँ. ..

//..निम्नलिखित रचना आपके समीक्षार्थ प्रेषित है, इसमें कौन सा पक्ष कमजोर है जहाँ परिवर्तन कर रचना को और भी बेहतर बनाया जा सकता है। कृपया अनुग्रह कर शिष्य को कृतार्थ करें।.. (आगे आपकी लघुकथा उद्धृत है) //

मेरा उत्तर --

इस रचना का कथ्य कमजोर है.

जो कुछ यह रचना कहना चाहती है वह स्पष्ट रूप से संप्रेषित नहीं हो रहा है. 

पारिवार में घनघोर रूप से व्याप्त ’पर उपदेसे कुसल बहुतेरे’ जैसी विसंगति को व्यवस्थित शब्द मिलने के स्थान पर आपकी कथा के माध्यम से पुत्र के मन में पिता के प्रति निहित विद्रुप खीझ मानों बाहर आ रही है.

जबकि होना यह चाहिये था कि ऐसी कोई खीझ रेखांकित न होती. अन्यथा यह उक्त पारिवार की नकारात्मकता को संप्रषित करेगी. फिर होगा यह कि कतिपय पाठक इसी अन्यथा आयाम को सतह पर ला कर आपकी लघुकथा को आँकने लगेंगे.  आपकी लघुकथा अपने हेतु से भटक जायेगी.

संभवतः मैं अपने कहे को सही ढंग से साझा कर पाया.

Comment by DR SHRI KRISHAN NARANG on July 11, 2013 at 12:56pm

Bahut achhi laghu katha, Vinay ji. Yadi hum apni baat par amal nahin karte to hamaare bachche kaise karenge?

Comment by वीनस केसरी on July 11, 2013 at 11:25am

कथा पात्रों के संवाद अस्वभाविक है
न आज पिता ऐसे दकियानूसी रह गये हैं न पुत्र अभी ऐसे मुंहफट हुए हैं ....

Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on July 11, 2013 at 11:20am
आदरणीय वीनस सर जी! अस्वाभाविक?
रचना या रचना की भावभूमि, या और कुछ?

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service