For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तो बंजरों में ही कश्ती चलाना अच्छा है

ग़मों में आपका यूँ मुस्कुराना अच्छा है

हंसी लबों पे रक्खे गम छुपाना अच्छा है  

 

कोई कभी जो पूछे है सबब यूँ हंसने का  

छुपा के चश्मेतर तो खिलखिलाना अच्छा है

 

मुझे तो हर घडी ये गलतियाँ बताता रहा

कोई कहे बुरा चाहे ज़माना अच्छा है

 

ग़ज़ब हैं खेल ये तकदीर के किसे क्या कहें  

खुद अपने आप से ही हार जाना अच्छा है

 

वो जिसकी चोट से दिल जार जार रोया था

उसी की राह से पत्थर उठाना अच्छा है

 

महल न घर न मुझको आशियाना कोई मिले

मेरे लिए तो तेरा दिल ठिकाना अच्छा है

 

लिपट के खूब तू रोया था उससे बिछड़ा जब

उसी का हँस के ऐसे दिल जलाना अच्छा है

 

अगर हो डर के समंदर में डूब जायेंगे

तो बंजरों में ही कश्ती चलाना अच्छा है

 

किसी को गर्दिशे दिल आपका पता न चले

यूँ “दीप” रात भर घर में जलाना अच्छा है

 

संदीप पटेल “दीप”

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 877

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 2, 2013 at 9:20pm

आदरणीय वीनस जी, आदरणीय सौरभ सर जी , ग़ज़ल के बह्र को लेकर मेरे दिमाग में तो यही था के 

बहरे रजज  और हजज के जिहाफ इस्तेमाल करके कुछ लिखूं किन्तु अंतिम जिहाफ २ २ बहरे हजज के हिसाब से नहीं आ पायी फिर भी लिख दिया सोचा की आप बड़ों की राय मिलेगी तो थोडा ज्ञान भी बढेगा के ..............मैंने महजूफ जिहाफ १ २ २ २ - १ २ २ के लिए अस्लम जिहाफ १२२ -२२ का इस्तेमाल किया है ............क्या यह सही है मार्गदर्शन कीजिये  

Comment by Pragya Srivastava on July 2, 2013 at 5:24pm

सुंदर प्रस्तुति............

Comment by Dr Ashutosh Mishra on July 2, 2013 at 4:04pm

सुन्दर प्रस्तुति ...

Comment by बसंत नेमा on July 2, 2013 at 10:37am

बहुत सुन्दर गजल .बधाई 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 2, 2013 at 5:03am

इस ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए शुभकामनाएँ , आदरणीय संदीपजी.

आपकी ग़ज़ल प्रथम दृष्ट्या सद्यः समाप्त तरही मुशायरे के बह्र पर ही दिख रही है जिसके अनुसार मिसरों का वज़्न १२१२ ११२२ १२१२ ११२ या १२१२ ११२२ १२१२ २२ होना था. यदि इसके अलावे हो तो कहियेगा. क्योंकि कई जगह मिसरों में इस वज़्न का निर्वाह नहीं हुआ है. 

कई शेर कहन के लिहाज़ से अच्छॆ हुए हैं.

शुभम्

Comment by वीनस केसरी on July 2, 2013 at 2:03am

अच्छी कहन के साथ साथ तागज्जुल पर आपकी पकड़ गहरी होती जा रही है
बधाई स्वीकारें  

एक बात बताईये भाई,
एक से अधिक बहर में में ग़ज़ल कह दी है क्या ???
ज़रा अरकान बताईये तो मुझे कुछ समझ आये और शिल्प पर कुछ कह सकूं ...


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on July 1, 2013 at 10:23pm

"अगर हो डर के समंदर में डूब जायेंगे

तो बंजरों में ही कश्ती चलाना अच्छा है"       बेहतरीन शे'र बेहतरीन ग़ज़ल  दीप जी,

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जिस प्रकार हम लाइव तरही मुशायरा, चित्र से काव्य तक, obo लाइव महा उत्सव इत्यादि का आयोजन करते हैं…"
13 hours ago
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"मैं लगभग 10 वर्ष पहले इस मंच से जुड़ा, बहुत कुछ सीखने को मिला। पारिवारिक व्यस्तता के कारण लगभग सोशल…"
13 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर हमारे समूह में कोई व्यवसायी हैं और उनके पास कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी फंड्स हों तो वे इसके…"
16 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सदस्यों में रुचि के अभाव ने इसे बंद करने के विचार का सूत्रपात किया है। ऐसा लगने लगा था कि मंच को…"
16 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" एक दुखद स्थिति बन रही है. लेकिन यह नई नहीं है. जब आत्मीयजनों और ओबीओ के समृद्ध सदस्यों की…"
16 hours ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"मै मंच के प्रारंभिक दिनों से ही जुड़ा हुआ हूं। इसका बंद होना बहुत दुखद होगा। मुझे लगता है कि कुछ…"
20 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय गणेश जी, जितना कष्ट आपको यह सूचना देते हुए हो रहा है, उतना ही कष्ट हम सब को यह सुनने में हो…"
20 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दु:खद "
20 hours ago
Admin posted a discussion

अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....

प्रिय सदस्य गण / प्रबंधन समिति के सदस्य गण / ओ बी ओ के सभी पाठक एवं शुभचिंतक गणसादर प्रणामआप सभी…See More
21 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)
"हाड़-मॉंस स्ट्रेट (लघुकथा) : "नेता जी ये क्या हमें बदबूदार सॅंकरी गलियों वाली बस्ती के दौरे…"
Thursday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)
"सादर नमस्कार आदरणीय मंच। इंतज़ार है साथियों की सार्थक रचनाओं का, सहभागिता का। हम भी हैं कोशिश में।"
Thursday
Admin posted a discussion

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)

आदरणीय साथियो,सादर नमन।."ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।प्रस्तुत…See More
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service