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प्रलय या आपदा [आल्हा छंद ] प्रथम प्रयास

रूद्र रूप ले आए भोले ,मचा प्रलय से हाहाकार
मानव आया कुदरत आड़े,उजड़ गए लाखों परिवार
यहाँ जिन्दगी चहका करती,अब हैं लाशों के अम्बार
दोहन लेकर आया विपदा,हम मानस ही जिम्मेवार


उमड़ घुमड़ बादल जो आए,छम छम कर आई बरसात
ध्वस्त हुए सब मंदिर मस्जिद,दिन में ही हो आई रात
कुदरत हुई खून की प्यासी, प्रलय मचा है चारों ओर
कुपित शिवा जलमग्न हो गए,आया है कलयुग घनघोर

      ..............मौलिक व अप्रकाशित...............

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Comment by Sarita Bhatia on June 28, 2013 at 6:18pm

ravikar sir laazwaab 

aapne sahi kaha sarkaar jyada jimedaar hai iske liye 

Comment by Sarita Bhatia on June 28, 2013 at 6:17pm

aman kumar ji prabandhan bina prakriti ko chede bhi kiya ja sakta hai 

Comment by Sarita Bhatia on June 28, 2013 at 6:16pm

 Jitendra Pastariya ji hardik abhaar meri rachna ke sath sehmat hone ke liye 

Comment by Sumit Naithani on June 28, 2013 at 3:49pm

सुंदर प्रस्तुति 

Comment by बसंत नेमा on June 28, 2013 at 12:11pm

आज कुदरत भी बोल रही है तेरा तुझको अर्पण  क्या लागे मेरा ,,, हमने उसे जो दिया उसने बही वापस कर दिया .... बहुत सुन्दर रचना , बधाई .... 

Comment by vijay nikore on June 28, 2013 at 10:17am

आदरणीया सावित्री जी:

 

सामयिक स्थिति पर अच्छी प्रस्तुति के लिए बधाई।

 

सादर,

विजय निकोर

Comment by रविकर on June 28, 2013 at 9:39am

बढ़िया शब्द संचयन बहना, भावों का बढ़िया सहकार |
सरिता सुन्दर पावन सरिता मचा रही है हाहाकार |
कुदरत से करते ही रहते हम सब मिलकर के खिलवार |
जनता तो कम ही दोषी है, ज्यादा दोषी है सरकार-

Comment by aman kumar on June 28, 2013 at 8:58am

दोहन लेकर आया विपदा,हम मानस ही जिम्मेवार

सही कहा आपने ! प्रक्रति का मतलब ही है की उसमे कोई छेड़ छाड़ न हो |

पर सतत विकास के लिए प्राकेर्तिक प्रबंधन भी जरुरी है ...

आभार 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 27, 2013 at 11:59pm
"रूद्ररूप लेआएभोले ,मचाप्रलय से हाहाकार

मानवआयाकुदरत आड़े,उजड़ गएलाखोंपरिवार "...आदरणीया...सरिता जी, यह सच कहा आपने अपनी रचना में जब भी किसी प्रकार की आपदा होगी, मानव माञ को ही भोगना पड़ता है जबकि यह सभी विपदाऐं उसी मानव के स्वार्थ से उत्पन्न हो रही है...
Comment by Sarita Bhatia on June 27, 2013 at 11:23pm

केवल प्रसाद जी एवं राम शरिमोनी पाठक जी हार्दिक आभार  

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