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साथी रे बिन प्रीत तुम्हारी  रीती है मन की गागर 

नदिया  की तृष्णा  हरे कैसे लवणित  बूँद -बूँद सागर 

 अवगुंठित भाव होकर अधीर 

गीतों में निरी  भरते हैं  पीर

विरह कंटक चुभ हिय  घाव करें  

पीड़ा अँखियन  कर जायँ उजागर

साथी रे बिन प्रीत तुम्हारी  रीती है  मन की गागर 

नदिया  की तृष्णा  हरे कैसे लवणित  बूँद -बूँद सागर 

सिसकती गलियाँ पनघट  रोता  

नीर जमुना के नैना  भिगोता   ,

श्वास मरीचिका में उलझाये

छल-बल से मोरा नटवर नागर

साथी रे बिन प्रीत तुम्हारी  रीती है  मन की गागर 

नदिया  की तृष्णा  हरे कैसे लवणित  बूँद -बूँद सागर 

संत्रस्त  सम्मूढ़ कुंदन किसलय 

तज  कदम्ब कि  डार धूरि में विलय

कर  कुंठित कर्ण भरमाय रहा  

बाँसुरिया राग तिलस्मी आगर

साथी रे बिन प्रीत तुम्हारी रीती है मन की गागर 

नदिया  की तृष्णा  हरे कैसे लवणित  बूँद -बूँद सागर 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 8, 2013 at 9:51pm

आदरणीय अशोक रक्ताले जी आपकी प्रशंसा मिली गीत लिखना  सार्थक हुआ हार्दिक आभार आपका इस उत्साह वर्धन हेतु 

Comment by Ashok Kumar Raktale on June 8, 2013 at 9:43pm

साथी रे बिन प्रीत तुम्हारी रीती है मन की गागर
नदिया की तृष्णा हरे कैसे लवणित बूँद -बूँद सागर ....वाह!बहुत खूब.
आदरेया राजेश कुमारी जी सादर, बहुत सुन्दर रचना सादर बधाई स्वीकारें.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 3, 2013 at 10:56am

आदरणीया  कुंती जी आपको गीत पसंद आया मेरा लिखना सार्थक हुआ आपका हार्दिक आभार |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 3, 2013 at 10:54am

आदरणीया अन्नापूर्णा  जी  आपका हार्दिक आभार आपके हिय तल  को ये गीत छू सका लेखन को सार्थकता मिली। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 3, 2013 at 10:53am

आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद जी मेरे गीत को आत्मीय अनुमोदन देने हेतु आपका हार्दिक आभार आपके हिय तल  को ये गीत छू सका लेखन को सार्थकता मिली। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 3, 2013 at 10:50am

आदरणीय विजय निकोर जी आपकी प्रतिक्रिया से लेखनी को एक नव ऊर्जा प्राप्त होती है हार्दिक आभार आपका |

Comment by coontee mukerji on June 3, 2013 at 1:52am

साथी रे बिन प्रीत तुम्हारी रीती है मन की गागर 

नदिया  की तृष्णा  हरे कैसे लवणित  बूँद -बूँद सागर........राजेश जी .....नायिका की विरह वेदना की बहुत सुंदर अभिव्यक्ति . आपकी सिद्धहस्त  लेखनी का कमाल है.../सादर / कुंती .

Comment by annapurna bajpai on June 3, 2013 at 1:12am

रीती है मन की गागर - आदरणीया राजेश कुमारी जी बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ है मन के भावों को उद्भासित करती हुई , बहुत बधाई आपको ।

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 2, 2013 at 7:24pm
आदरणीया..राजेश कुमारी जी, बहुत सुंदर पंक्तियां...शुभकामनायें
Comment by ram shiromani pathak on June 2, 2013 at 1:25pm

बहुत ही सुंदर आदरणीया// हार्दिक  बधाई!

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