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चाँद सितारों से लड़ना आसान नहीं

चाँद सितारों से लड़ना आसान नहीं
क्या होगा अब हश्र कोई अनुमान नहीं
वक़्त निभाएगा अपना दायित्व "अजय "
मेरे हांथों में अब कोई सामान नहीं................
.
जो बांटा करता है सबको जीवन रस ,
पीने को बस गरल मिला केवल उसको
जो पथ पर तेरे फूलों का बना बिछौना ,
काँटों का इक सेज मिला केवल उसको
कैसी हैं हम सन्तति , हम पूत कहा के ,
बचा सके इक जननी का सममान नहीं
वक़्त निभाएगा अपना दायित्व "अजय "
मेरे हांथों में अब कोई सामान नहीं ...................

.
जब फूलों की गंध भयाकुल हो जायेगी
जब दरिया को बहने से डर व्यापेगा
जब ओंस की बूँदें सहमी सहमी रोयेंगी
जब किरणों पर अनजाना सा भार रहेगा
हम रखवाली कर न सकेंगे सुबह की जब
कितना होगा अंधकार ये ज्ञान नहीं
वक़्त निभाएगा अपना दायित्व "अजय "
मेरे हांथों में अब कोई सामान नहीं......................
 ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
अप्रकाशित/अमुद्रित
सर्वाधिकार - अजय कुमार शर्मा

Views: 361

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Comment by seema agrawal on January 2, 2013 at 9:51pm

वक़्त निभाएगा अपना दायित्व "अजय "
मेरे हांथों में अब कोई सामान नहीं.....बहुत खूब 

रचना पर थोड़ा ध्यान देंगे तो प्रवाह और लय निखरेगी ...शुभकामनाएं 

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 31, 2012 at 8:38pm

जब फूलों की गंध भयाकुल हो जायेगी
जब दरिया को बहने से डर व्यापेगा
जब ओंस की बूँदें सहमी सहमी रोयेंगी
जब किरणों पर अनजाना सा भार रहेगा
हम रखवाली कर न सकेंगे सुबह की जब
कितना होगा अंधकार ये ज्ञान नहीं
वक़्त निभाएगा अपना दायित्व "अजय "
मेरे हांथों में अब कोई सामान नहीं......................सच बहुत भयानक तम होगा.

सुन्दर रचना आदरणीय अजय जी बधाई स्वीकारें.

Comment by Dr.Ajay Khare on December 31, 2012 at 4:24pm

manniy hamnaam badhai

Comment by Shyam Narain Verma on December 31, 2012 at 11:43am

BAHOT KHOOB..........................

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