For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

शुभ्रांशु जी के हास्य लेखन से प्रेरित हो कर एक हास्य लिखने की कोशिश ...........

जब भी शुभ्रांशु जी के हास्य-व्यंग्य के लेख पढ़ती हूँ ...लगता है कितनी आसानी और सहजता से से वो सब कुछ लिख जाते हैं और हँसा भी देते हैं ......एक दिन अचानक ही लगा दरअसल वो आसानी से लिख नहीं जाते है बल्कि यह लिखना बहुत आसान है l  क्यों न मै भी कुछ  हास्य व्यंग टाइप की चीज़ लिखूँ .

कविता में तो बड़ी पेचीदगियां है ..... एक कविता लिखने में तो कभी कभी कई दिन लग जाते हैं l इस चक्कर में कई-कई दिनों तक कुछ पोस्ट नहीं कर पाती l औरों की पोस्ट पर जाकर वाह, बहुत खूब ,क्या कहने ,क्या बात जैसे जुमले कहना तभी अच्छा लगता है जब अपनी पोस्ट पर वो पलट कर वापस आते रहें ......कमसे कम ये आलेख इस उगाही के काम तो आयेंगे l हर दिन ना सही दो - तीन दिन में तो एक लिख ही लूंगी l और जब वो लिख सकते हैं तो मै क्यों नहीं l मै तो कविता सुनाने के लिए कभी किसी लाला के आगे-पीछे नहीं घूमी और न ही कभी किसी सम्मलेन स्थल से डर कर फरार हुयी क्यों कि  इतनी समझ मुझे पहले से ही है कि अपनी भद पिटवाने में कोई समझदारी नहीं     l मंच पर चढ कर धराशायी होने से ज्यादा अच्छा है, नेट पर ही जमे रहो ......जब आसान रास्ता सामने हो तो फिर हमेशा कठिन राह पर ही क्यों डटे रहना l और मै कौन सा इसे फुल टाइम जॉब बनाने जा रही हूँ 


तुरंत ही निर्णय ले लिया आज से मै भी हास्य-व्यंग्य के आलेख लिखूंगी l


बस कागज़ कलम के साथ पक्का इरादा धारण कर बैठ गयी लिखने l.कुछ भी तो मुश्किल नहीं है .....इसके,उसके ,अपने किसी के भी एक पूरे दिन का ब्योरा लिख दूंगी l आम आदमी का हर एक दिन किसी हास्य से कम थोड़े ही होता है ...शुभ्रांशु जी ने भी तो आम सी बात को खास बना कर लिख दिया है जब वो लिख सकते हैं तो मै क्यों नहीं l एक बार फिर अभिमान जागा

अब समय था विषय निश्चित करने का,

लिखूं तो आखिर किस विषय पर ...राजनीति पर ????....अरे नहीं!!!!! इस पर तो पहले भी बहुत कुछ लिखा जा चुका है l आए दिन यहाँ -वहाँ छपने वाले नेताओं के कार्टून ,पैरोडी,और चुटकुलों से लोग बोर हो चुके हैं ..साथ ही लिखने वाले हद से बहुत आगे के स्तर तक की बातें लिख चुके हैं l उस स्तर से कम की बात लोगों को हँसा नहीं पायेगी ,और यदि स्तर थोडा सा भी ज्यादा हो गया तो देश द्रोह के मामले में जेल जाने का खतरा ....मुझे अपने लिए जमानत के भी कोई आसार नहीं दिख रहे थे ...पतिदेव तो शायद खुद जेल तक पहुंचा के आयेंगे इस सोंच के साथ कि ,रात-दिन की कंप्यूटर और कविता बाज़ी के जंजाल से कुछ दिन तो राहत होगी ...और ये कलयुगी बच्चे मेरे जेल जाने की भट्टी में भी अपनी मौज-मस्ती की रोटी ही सकेंगे l टीवी वालों को, अखबार वालों को, रेडियो वालों को इंटरव्यू देने के चक्कर में इन्हें ये भी जरूरी नहीं लगेगा कि माँ को जेल से बाहर भी लाना है l रोज नए चैनेल्स पर इंटरव्यू देने के लिए नयी बुशर्ट -जींस खरीदने पर जो पैसे उडाये जायेंगे सो अलग l
न बाबा न ऐसा रिस्क नहीं लेना मुझे अतः राजनीति को विषय के रूप में हमेशा के लिए निरस्त घोषित कर दिया l

फिर सोचा धर्म पर ,अंधविश्वास या ढोंगी बाबाओं पर लिखूँगी बढ़िया मसाला मिलेगा ...
परन्तु कुछ अडंगा यहाँ भी दिखा l इस विषय पर कुछ लिखने से सबसे पहली बगावत तो मेरे मायके से ही तोहफे के रूप में आने वाली है ........मेरी धर्मपरायण माँ मेरी शुद्धि के लिए जाने कितने मंदिरों के चक्कर लगा डालेगी l कितने ही पंडितों को हवन पूजा के लिए न्योत देगी l जितनी बार कोई पंडित मेरी पत्री देखकर किसी बुरे परिणाम की घोषणा करेगा वो फोन पर पूरे विस्तार से बचने के उपाय सहित चर्चा करेगी l पापा ,भैया,भाभी और भतीजों का कोप भाजक मुझे ही बनना पडेगा ..... माँ के इन सब शागूफों में होने वाले खर्चो का जो रायता फैलेगा, भाभी उस सारी रकम को तीज त्योहारों पर मुझे मिलने वाली साड़ी की क्वालिटी घटा कर पूरा करेगी न न न ,मुझे अपनी साड़ी बहुत प्यारी है l मतलब यह टौपिक भी कैंसिल l

काम वाली बाई ? न न उसका मजाक नहीं उड़ा सकती क्योंकि उससे बड़ा भगवान तो इस धरती पर मेरे लिए कोई और है ही नहीं l बहुत श्रद्धा रखती हूँ उस पर मै ..उसके लिए हफ्ते में एक दिन व्रत तक रखती हूँ इस कामना के साथ कि हे भगवान उस हमेशा स्वस्थ रखना

टीवी सीरियल.....????वो सब तो खुद ही हास्य का पर्याय हैं l अक्षरा रोती है बच्चे हँसते है कभी उसके रोने के कारण को जान कर तो कभी आंसूं पोछती मेरी सासू जी को देख कर l अब हास्य पर हास्य कैसा..............

किटी पार्टी ,साड़ी ,जेवर ये सब तो बहुत ही घिसे-पिटे विषय है ...फिर किस पर लिखा जाये .....
पहले ही पड़ाव पर दिमाग का बाजा बज चुका था
पर हार कैसे मानूँ... तभी मेरे दिमाग ने, जिसने पहले भी कई बार आड़े वक्त पर परिस्थितियों को मेरे पक्ष में चतुराई से मोड़ा था , मेरा साथ दिया और चुस्ती के साथ समझाया 'अरे जाने भी दो हास्य व्यंग्य को....... कविता लिखना ही बहुत मुश्किल और टाइम टेकिंग काम है उससे ही कहाँ फुर्सत मिल पायेगी मुझे जो ये सब लिखूंगी l पता नहीं अब लाlला भाईजी भी इन बेचारे शुभ्रांशु जी की कवितायें सुनते हैं या नहीं और फिर अब तो मंच छोड़ कर भागने का भी इलज़ाम है ही इन पर, क्या पता अब इन्हें कोई बुलाएगा भी या नहीं ,किसी सम्मेलन में l
बस इसी सोच के साथ कागज और कलम और दिमाग का बोझ जल्दी से अलमारी में बंद कर, लंबी सी साँस ले सोने के लिए चल दी l

Views: 1015

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by seema agrawal on September 27, 2012 at 10:58am

शुक्रिया प्रवीण आपने सही कहा .......हास्य और व्यंग्य सच में बहुत मुश्किल विधा है .....शुभ्रांशु जी जिस कद का हास्य लिखते हैं वो 

प्रशंसनीय है 

Comment by seema agrawal on September 27, 2012 at 10:55am

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय लक्ष्मण जी आपकी उपस्थिति हमेशा ही प्रेरणादायी होती है 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 27, 2012 at 8:45am

किस पर लिखूं सोचते- सोचते एक बढ़िया रोचक आलेख तैयार हो गया सीमा जी बहुत अच्छा लगा पढ़कर बाई वाला आइडिया तो बहुत अच्छा है अब मैं   भी उसके लिए उपवास रखूंगी हाहाहा 

Comment by praveen on September 26, 2012 at 10:38pm

आत्ममंथन के बाद बहुत सुंदर लेखन का परिचय.....वास्तविकता से हास्य उत्पन्न करने के सफल प्रयास पे बधाई आपको..!!

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 26, 2012 at 7:35pm
लेखन भी हो गया, मिला सास ले सोने का राज 
सीमा जी ने कर लिया देखो  एक पंथ दो काज |
मंथन के लिए बधाई 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Saturday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Jul 14
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Jul 9

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service