For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अहसासों के दरमियां 
मेरे ख़्वाबों को जगाने 
जब तुम आओगे ना 
कुछ शरामऊँगी मैं 
धडकनों को थामकर 
कुछ बहक सा जाऊँगी मैं 
मुझे बहकाने तुम आओगे ना ????

इठलाती सी धूप में 
रूख पर नक़ाब गिराने 

जब तुम आओगे ना 
तेज़ किरणें शरमा जायेंगी 
तुम्हारे अक्स के आ जाने से 
मेरी परछाई को ख़ुद में 
समाने तुम आओगे ना ????

अकेलेपन में भींगी आँखों 
के आंसूओं को पोंछने 
जब तुम आओगे ना 
एक मुस्कान खिल जायेगी 
कुछ किस्से सुनने 
भटकती इस ज़िंदगी में 
मुझे अपना बनाने 
आरजुओं को जगाने तुम आओगे ना ????

दो नहीं एक ही है हम 
इस हौसले को बढ़ाने 
जब तुम आओगे ना 
चाँद की चाँदनी तेज़ हो 
अपना तेज़ फैलायेगी 
उसकी रौशनी मुझ तक 
आकर तेरा अहसास करायेगी 
अहसास कराने अपना तुम आओगे ना ????

कह दो एक बार 
तुम आओगे ना ????
तुम आओगे !!!!!

दीप्ति शर्मा

Views: 772

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by deepti sharma on January 22, 2013 at 10:40pm

आदरणीय अम्बरीश  जी और आदरणीय  आशीष जी बहुत बहुत शुक्रिया .. यूँ ही मार्गदर्शन करते रहें आभार ..

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on January 6, 2013 at 12:42pm

मिलन की अजब तड़प लिए एक भावपूर्ण रचना। बहुत खूब|

Comment by Er. Ambarish Srivastava on October 15, 2012 at 7:13pm

//अकेलेपन में भींगी आँखों 
के आंसूओं को पोंछने 
जब तुम आओगे ना 
एक मुस्कान खिल जायेगी 
कुछ किस्से सुनने 
भटकती इस ज़िंदगी में 
मुझे अपना बनाने 
आरजुओं को जगाने तुम आओगे ना ????//

भावपूर्ण रचना .......बहुत बहुत बधाई !

Comment by deepti sharma on October 15, 2012 at 5:26pm

शुक्रिया आदरणीय सौरभ पाण्डेय  जी ... आपका बहुत बहुत आभार . मैं जरुर कोशिश करुँगी

Comment by deepti sharma on October 15, 2012 at 5:25pm

शुक्रिया आदरणीय नादिर खान जी ... आपका बहुत बहुत आभार


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 11, 2012 at 2:47am

विह्वलता को शाब्दिक बनाना सरल नहीं है. आपके प्रयास को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ.

आप नवगीतों पर सार्थक प्रयास करें दीप्तिजी. परिणाम से आप, सच मानिये, स्वयं चौंक जायेंगीं.  शुभेच्छाएँ

Comment by नादिर ख़ान on October 9, 2012 at 5:11pm

बहुत ही उम्दा रचना दीप्ति जी

Comment by deepti sharma on September 2, 2012 at 12:09pm

आदरणीय दीपक शर्मा जी ... आदरणीय योगी सारस्वत जी .... आदरणीया रेखा  जी 

बहुत बहुत आभार ....यूँ ही मार्गदर्शन करते रहें शुक्रिया

Comment by deepti sharma on September 2, 2012 at 12:06pm

आदरणीय हरीश जी ... आदरणीय श्री राम  जी .... आदरणीय नवल किशोर सोनी जी 

बहुत बहुत आभार ....यूँ ही मार्गदर्शन करते रहें शुक्रिया

Comment by Rekha Joshi on August 28, 2012 at 7:31pm

अति सुंदर भाव दीप्ति जी ,हार्दिक बधाई 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

रामबली गुप्ता posted a blog post

कर्मवीर

आधार छंद-मनहरण घनाक्षरी सुख हो या दुख चाहें रहते सहज और, जग की कठिनता से जो न घबराते हैं। स्थिति…See More
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर और समसामयिक नवगीत रचा है आपने। बहुत बहुत हार्दिक बधाई।"
22 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

दोहा पंचक - आचरण

चाहे पद से हो बहुत, मनुज शक्ति का भान। किन्तु आचरण से मिले, सदा जगत में मान।। * हवा  विषैली  हो …See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई तिलक राज जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, स्नेह व उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार। 9, 10…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई दयाराम जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। कुछ मिसरे और समय चाहते है। इस प्रयास के…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। आ. भाई तिलक राज जी के सुझाव से यह और…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई अजय जी, प्रदत्त मिसरे पर गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। हार्दिक बधाई।"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
" आदरणीय तिलक राज कपूर साहब,  आप मेरी प्रस्तुति तक आये, आपका आभारी हूँ।  // दीदावर का…"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई लक्ष्मण सिंह धानी ' मुसाफिर' साहब हौसला अफज़ाई के लिए  आपका बहुत-बहुत…"
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आपने खत लिखा उसका ही असर है साईंछोड़ दी अब बुरी संगत की डगर है साईं धर्म के नाम बताया गया भाई…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"ग़ज़ल पर अपनी बारीक़-नज़र से टिप्पणी करने के लिए आपका आभार आदरणीय तिलकराज जी।  एक प्रश्न है: इस…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service