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खामोश हूँ

शांत सागर सी 
भीतर हलचल 
 
इक हूक 
सीने में उठती 
ज्वालामुखी सी 
 
प्यार किया 
दिल से चाहा
पर तन्हा 
 
काश कोई 
समझ पाता मुझे 
जी लेती 
 
लब खुले 
कुछ कहने को 
आवाज़ गुम
शब्द नही 
धड़कन में तुम
हूँ निशब्द  

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Comment

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Comment by Rekha Joshi on September 3, 2012 at 6:19pm

फूल सिंह जी ,आपका बहुत बहुत आभार 

Comment by PHOOL SINGH on September 3, 2012 at 2:24pm

रेखा जी प्रणाम,

बहुत ही सुंदर व्याख्यान....

फूल सिंह

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on August 9, 2012 at 12:42am

लब खुले 

कुछ कहने को 
आवाज़ गुम
शब्द नही 
धड़कन में तुम
हूँ निशब्द  
आदरणीय रेखा जी खूबसूरत प्यार के अहसास ....जब दिल ही बोल उठा तो जुबाँ तो मौन ही ....
जय श्री राधे ...आभार 
भ्रमर ५ 
Comment by अरुन 'अनन्त' on August 8, 2012 at 11:49am
शांत सागर सी 
भीतर हलचल
 वाह आदरणीया रेखा माँ क्या खूब, हार्दिक बधाई
Comment by Rekha Joshi on August 8, 2012 at 11:00am

आपका आभार ,आदरनीय अविनाश जी 

Comment by AVINASH S BAGDE on August 8, 2012 at 10:21am

शब्द नही 

धड़कन में तुम
हूँ निशब्द  ...khoob hai...wah.Rekha mam.
Comment by Rekha Joshi on August 6, 2012 at 9:46pm

आपका बहुत बहुत आभार राजेश जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 6, 2012 at 7:24pm

बहुत सुन्दर क्षणिकाएं बेहतरीन भाव बधाई रेखा जी 

Comment by Rekha Joshi on August 6, 2012 at 11:40am

उत्साहवर्धक कमेन्ट के लिए ,बहुत बहुत धन्यवाद ,आदरणीया डा प्राची जी 

Comment by Rekha Joshi on August 6, 2012 at 11:35am

आपका बहुत बहुत आभार संदीप जी 

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